30 March 2015

तरक्की का यह कैसा नया नजरिया दिखा रहा हिन्दुस्तान


तरक्की को चाहिए नया नजरिया का नारा बुलंद करने वाला अखबार वाकई एक हिन्दी जगत में एक नई ही कलाकारी की शुरुआत कर रहा है। खबर है कि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश से बचने के लिए संस्‍थान अब एडिटर यानी संपादक का पद खत्म कर उसकी जगह क्रिएटर और प्रोड्यूसर जैसे शब्द इस्तेमाल करने जा रहा है। सूचना के मुताबिक हिंदुस्तान प्रबंधन ने यह तय किया है कि किसी भी पद के लिए एडिटर या उससे जुड़े शब्द जैसे सब-एडिटर, सीनियर सब-एडिटर, चीफ सब-एडिटर, न्यूज एडिटर आदि पदनामों का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसकी जगह अब क्रिएटर और प्रोड्यूसर जैसे शब्द चलाए जाएंगे। रिपोर्टरों के लिए क्रिएटर और डेस्ककर्मियों के पदनाम में प्रोड्यूसर शब्द जोड़ा जाएगा।
 
... हां जी कोर्ट को गच्चा देने की पूरी तैयारी है।
मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू करने से बचने की कवायद में प्रिंट मीडिया संस्थान आए दिन रोज नए नए तरीके इजाद कर रहे हैं। कद्दावर संपादक शशि शेखर की अगुवाई वाला हिन्दुस्तान भी अब इस कतार में शामिल हो गया है। सूचना के मुताबिक कंपनी प्रबंधन ने एक शातिरपन यह भी दिखाया है कि पुराने लोग जिनको कंपनी में आए अभी तीन साल नहीं हुए हैं उनके पदनाम में कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। तय हुआ है कि संस्‍थान में जितनी भी नई नियुक्तियां होंगी नए डेजिग्नेशन के साथ भर्ती किया जाएगा। इसके अलावा तीन साल बाद कांट्रेक्ट के रिन्यूअल के समय पहले से कार्यरत कर्मचारियों का डेजिग्नेशन बदल दिया जाएगा। इन कर्मचारियों पर प्रबंधन की ओर से उस वक्त दबाव बनाया जाएगा कि नए पदनाम को स्वीकार करें अन्यथा रिन्यूअल नहीं होगा। गौरतलब है कि हिन्दुस्तान में नियुक्तियों की मौजूदा व्यवस्‍था के तहत कर्मचारियों की सेवा अवधि तीन साल की है उसके बाद कंपनी यदि कांट्रेक्ट रिन्यू करती है तो नौकर बरकरार रहती है, नहीं तो सेवा समाप्त। ऐसे में देखना होगा कि रिन्यूअल के समय कर्मचारी नए पदनाम को स्वीकार करते है या फिर प्रबंधन की इस कलाकारी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं।

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