17 April 2015

‘न्यूज ट्रेडर्स’ के खिलाफ मोदी की बोलती बंद, लड़ाई में साथ आए जनजान

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने के लिए विभिन्न मीडिया घरानों के खिलाफ लड़ रहे पत्रकारों व गैर पत्रकारों का धरना 27 अप्रैल को नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर होने जा रहा है।

मीडिया घरानों और मालिकों को आए दिन कोसने और प्रेस्टीट्यूट जैसी संज्ञा देने वाले मोदी के मंत्री इस मसले पर शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुंह गाड़े बैठे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले मीडिया मालिकों को ‘न्यूज ट्रेडर्स’ की संज्ञा देने और 56 इंच का सीना दिखाने वाले प्रधानमंत्री मोदी की भी इस मसले पर बोलती बंद है। दूसरी ओर कम्यूनिस्ट नेता अतुल अनजान ने इस लड़ाई में पत्रकारों का साथ देने की बात कही है। इससे निश्चित रूप से इस आंदोलन को बल मिलेगा।

अतुल कुमार अंजान ने 27 अप्रैल को जंतर-मंतर पर होने वाले धरने में शामिल होने की स्वीकृति दे दी है। हालांकि उन्होंने यह भी अंदेशा जताया है कि पत्रकार भले ही सुप्रीम कोर्ट में बड़े-बड़े अखबार मालिकों के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन जब जरूरत आएगी तो भाग खड़े होंगे।

उन्होंने आईबीएन 7 सहित पिछले कई वर्षों में नौकरी से निकाले गए पत्रकारों के मामलों की मिसाल देते हुए कि हम तो धरने पर पहुंच गए, लेकिन जिनका धरना था वो ही नहीं आए। इसलिए पत्रकार बिरादरी का अब फर्ज बनता है कि वह मजबूती के साथ आगे आकर ऐसी आशंकाओं को गलत साबित करें और बुलंदी के साथ अपने हक की आवाज उठाएं।

12 April 2015

जुकर बर्ग के व्हाट्स ऐप को बड़े अंबानी ने दी चुनौती

सोशल साइट फेसबुक शुरू करने वाले मार्क जुकरबर्ग द्वारा बीते वर्ष खरीदी गई व्हाट्स ऐप को एक बार फिर से चुनौती देने की कोशिश की गई है। इस बार चुनौती पेश की गई है बड़े अंबानी यानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जिओ की ओर से।

रिलांयस ने व्हाट्स ऐप की टक्कर में अपना इंस्‍टेंट मैसेजिंग ऐप 'जिओ' लॉन्‍च किया है। यह ऐप एंड्रायड और आईओएस दोनों पर काम करेगा। इसमें यूजर को वह सारे फीचर्स तो दिए ही जा रहे हैं, जो व्‍हाट्स ऐप में मौजूद हैं, कुछ ऐसे फीचर भी इसमें पेश किए गए हैं, जो व्हाट्स ऐप अबतक अपने ग्राहकों को नहीं दे सका है। मिसाल के तौर पर जियो के यूजर वॉयस कॉल के अलावा ग्रुप वॉइस कॉल और वीडियो कॉल भी कर सकेंगे।

जियो एक आम मैसेजिंग ऐप की तरह मैसेज के अलावा फोटो और वीडियो शेयरिंग की सुविधा तो ही देती है, इसके आलावा जियो की मदद से यूजर्स अपने डूडल्‍स और वॉयस नोट भी बना सकते हैं। इसके अलावा यूजर्स ऐप का उपयोग करते हुए अपने चुनिंदा दोस्‍तों से अपनी लोकेशन भी शेयर कर सकते हैं। ब्‍लैकबैरी के बीबीएम मैसेंजर की तरह ही जिओ यूजर को न्‍यूज, अपडेट और स्‍पेशल प्रमोशन ब्राउज करने की आजादी भी देता है। इस तरह जियो के यूजर अपने खास लोगों के बीच लगातार बने रह सकते हैं।
 
गौरतलब है कि एंड्रायड और दूसरे ओपरेटिंग सिस्‍टम्‍स पर चलने वाले व्हाट्स ऐप को इससे पहले भी वी-चैट, टेलीग्राम और लाईन, वाइबर और हाइप जैसे ऐप की ओर से समय-समय पर चुनौती दी गई। इसके बावजूद व्‍हाट्सऐप इंस्टेंट मैसेजिंग की दुनिया में टॉप पर बरकरारर है।

अरे मोदी जी! फ्रांस में पद्म भूषण शर्माजी थोड़ी बैठे हैं आपका प्लांटेड इंटरव्यू चलाने के लिए

सरकार भले ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान रक्षा और परमाणु क्षेत्र सहित कई तरह के ‘बड़े’ द्विपक्षीय समझौते किए जाने का दम भर रही हो, पर पेरिस में मोदी महाशय की जो किरकिरी हुई उसकी ऊंचाई भी एफिल टावर से कतई कम नहीं कही जा सकती।
दरअसल सातवें आसमान पर चल रहे सत्ता के अहंकार और पालतू संपादकों को उंगलियों के इशारे पर नचाने की आदत में मोदी जी ने फ्रांस में भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश कर डाली। ... बस जनाब, यहीं मात खा गया इंडिया। मोदी जी ने फ्रांस के अग्रणी अखबार 'ल मॉन्द' में अपना प्री फेब्रिकेटेड और प्लांटेड इंटरव्यू छपवाने की इच्छा जाहिर की, तो खरी-खरी सुननी पड़ गई देसी तीस मार खान को। दरअसल मोदी जी शायद भूल गए कि फ्रांस उनकी टेरिटरी नहीं है, जहां वह दूरदर्शन को मोदी दर्शन बना लेंगें और आकाशवाणी पर वक्त बे वक्त मोदी के ‘मन की बात’ बात बजेगी। 

मोदी जी को शायद यह भी याद नहीं रहा कि फ्रांस में भारत की तरह उनके कोई पद्म भूषण शर्मा जी नहीं बैठे हुए हैं, जो प्लांटेड इंटरव्यू चलाने और फर्जी अदालत लगाने में महारत रखते हों। सो अखबार ने न केवल मोदी जी का ऐसा इंटरव्यू छापने से इनकार ‌कर दिया बल्कि उसके सोशल साइट पर इसका नगाड़ा पीट कर मोदी जी की दुनिया भर में खूब भद्द भी पिटवाई। 

'ल मॉन्द' के दक्षिण एशियाई संवाददाता जूलियॉं बुविशॉ ने ट्विटर पर इस बात का खुलासा भी कर दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि 'हमें बताया गया था कि नरेंद्र मोदी सवालों के जवाब लिखकर देंगे, न कि सामने बैठकर। इसलिए 'ल मॉन्द' ने इंटरव्यू से इनकार कर दिया।' इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने दूसरे अखबार 'ल फिगार' से इस इंटरव्यू के लिए बात की।

इस तरह 'ल मॉन्द' ने एक तीर से दो नहीं, तीन शिकार कर दिखाए। उसने न सिर्फ मीडिया को मुट्ठी में समझने के मोद के गुरूर को उजागर किया, बल्कि पूर्वनियोजित या फिक्स इंटरव्यू छापने से इनकार करके अपनी साख को जनता के बीच और मजबूत कर लिया। इसके साथ ही उसने प्रतिद्वंद्वी अखबार 'ल फिगार' में छपे मोदी के इंटरव्यू की हकीकत भी दुनिया के सामने रख दी।

दरअसल 'ल फिगार' 'ल मॉन्द' का प्रतिद्वंद्वी अखबार होने के साथ ही उस कंपनी दसौ का अखबार है, जो भारत को 126 रफेल लड़ाकू विमान बेचने की कोशिश कर रही है।

08 April 2015

मीडिया को तवायफ बता रहे मोदी के ये ‘महान’ मंत्री जी

मोदी सरकार चुनाव में किए गए बड़े-बड़े वायदों को निभा पाने में दस माह बाद भी भले ही मीलों पीछे खड़ी नजर आती हो, पर मोदी के विचित्र मंत्री और सांसद आए दिन नए-नए विवाद खड़े करने में जरा भी पीछे नहीं हैं। ज्यादातर विवाद मंत्रियों की बदजुबानी या बेमतलब के बयानों से पैदा हो रहे हैं।

साध्वी निरंजन ज्योति के रामजादे-हरामजादे वाले विवाद और साक्षी

वीके सिंह ने पहले तो हिंसा में घिरे यमन से भारतीयों को निकालने के मिशन की तुलना पाकिस्तान के दूतावास में होने वाले कार्यक्रमों से की। इस तुलना पर जब विवाद हुआ तो वह मीडिया पर ही भड़क गये और मीडिया के खिलाफ आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी की।

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर वीके सिंह ने लिखा कि 'दोस्तों आप प्रेसटीट्यूट्स से और क्या उम्मीद कर सकते हैं। हैशटैग टाइम्स नाउ डिजास्टर से किए गए ट्वीट में म‌‌ीडिया के लिए जिस प्रेस्टिट्यूट्स शब्द का इस्तेमाल किया गया है, वह दरअसल प्रेस और प्रॉ‌स्टिट्यूट का जोड़ है। वीके सिंह ने ट्वीट के अगले हिस्‍से में कहा है कि अंतिम बार में अर्नब गोस्वामी ने ई के स्‍‌थान पर ओ समझ लिया था।

वीके सिंह के इस बेतुके बयान की मीडिया जगत में तीखी आलोचना हो रही है। कहा जा रहा है कि 56 इंच के सीने वाले मोदी जनता के सामने मंच पर तो बड़े शेर बनते हैं, पर अपने बड़बोले मंत्रियों की जबान पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। शायद उनकी खुद की बतोले बाजी की आदत इसमें आड़े आ रही है कि जब अपनी जबान पर ही कंट्रोल नहीं जनाब का, तो दूसरों को किस मुंह से क्या कहें भला!
महाराज के बयानों के बाद अब पूर्व आर्मी चीफ और केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह एक बार विवादित बयान देकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इस बार उन्होंने मीडिया के खिलाफ विष वमन किया है। मीडिया को तुलना वेश्या से करने की नीयत से उन्होंने अंग्रेजी के प्रास्टीट्यूट शब्द की मीडिया के लिए प्रेस्टीट्यूट शब्द का इस्तेमाल किया है।

‘गुरु’ को लगा झटका, टॉप-10 से हो गए बाहर

अंग्रेजी के मुकाबले राष्ट्र भाषा हिन्दी के बलबूते हमारे देश में भले ही रोजी-रोटी कमा पाना मुश्किल भरा काम हो, पर खुद अंग्रेजी भाषा हिन्दी के कई विशिष्ट शब्दों को तेजी से अपना रही है। मंत्र, ज्ञान,पंडित और गुरु जैसे कई शब्द हाल के वर्षों में तेजी से अंग्रेजी में प्रचलित हुए हैं।

ग्लोबल लैंग्वेज मॉनीटर (जीएलएम) की ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक ‘गुरु’ शब्द दुनिया के अंग्रेजी भाषी कारोबारी जगत में 50 सबसे ज्यादा प्रचलित शब्दों में शामिल है। हालांकि बीते वर्ष के दौरान इसकी लोकप्रियता में कुछ कमी आई है। सर्वे के मुताबिक 2014 की सूची में ‘गुरु’ शब्द 15वें स्थान पर आ गया है, जबकि एक साल (2013) की सूची में यह छठे नंबर पर था। सर्वेक्षण के अनुसार इस लिहाज से 50 शीर्ष कारोबारी शब्दों में ‘कंटेंट’ लगातार दूसरे साल पहले नंबर पर बना हुआ है।

जीएलएम की ताजा सूची में कंटेंट पहले स्थान पर है, जबकि उसके बाद सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले कारोबारी शब्दों में नेट-नेट, बिग डेटा, एट द एंड ऑफ द डे तथा सोशल मीडिया शामिल हैं। इसके अलावा टॉप-10 शब्दों में ऑफलाइन छठे, फेसटाइम सातवें, पिंग आठवें, रॉक एंड ए हार्ड प्लेस नौंवे तथा विन-विन दसवें स्थान पर रहा। यह रैकिंग अंग्रेजी भाषी दुनिया में शब्दों के इस्तेमाल पर आधारित है।

07 April 2015

आदत से हैं मजबूर, क्या करें हुजूर

इन्हें पता है कि मजाक बनेगा, फिर भी बड़े बोल बोलने से बाज नहीं आते। ये महाशय कोई और नहीं, बड़बोलेपन के लिए दुनिया भर में विख्यात हो चुके हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। बतोलेबाजी की आदत से अब यह बेचारे चाह कर भी छूट नहीं पा रहे हैं।
मोदी महाशय की यह बेबसी पर्यावरण मंत्रियों के सम्मेलन में खुद उनके बोल से उजागर हो गई। सम्मेलन में बिजली बचाने, रीसाइकलिंग और पर्यावरण संरक्षण के कुछ दादी मां सरीखे नुस्‍खे दिए। हफ्ते में एक दिन गाड़ी छोड़कर साइकिल चलाने की सलाह देने के बाद मोदी ने कहा कि उन्हें पता है कि उनकी इन बातो का मजाक उड़ाया जा सकता है। कोई कह सकता है कि मोदी साइकल कंपनियों के एजेंट बन गए हैं।
मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत की परंपरा में रही है, इसके बावजूद भारत पर्यावरण के मुद्दों पर दुनिया का नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं आ सका है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मोदी ने 10 शहरों में प्रदूषण स्तर की निगरानी करने के लिए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की शुरुआत की। मोदी ने इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण और बिजली बचाने के कुछ टिप्स भी सुझाए।
उन्होंने कहा कि भारत में रीसाइकलिंग की परंपरा सदियों पुरानी है। दादी मां घर में पुराने कपड़ों से रात को बिछाने के लिए कथरी बना देती थीं। उसके भी बेकार होने पर झाड़ू-पोछा के लिए उस कपड़े का इस्तेमाल होता है। गुजरात के लोग आम खाते हैं, लेकिन वे आम को भी इतना री-साइकल करते हैं कि कोई सोच भी नहीं सकता है।
मोदी ने चांदनी रात में बिजली बचाने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा कि अगर शहरी निकाय तय कर लें कि पूर्णिमा की रात को स्ट्रीट लाइट न जलाएं और पूरे मोहल्ले में सूई में धागा डालने का त्योहार मनाया जाए, तो इससे ऊर्जा बचाई जा सकती है। मोदी ने बताया कि कि गांवों में परंपरा थी कि चांदनी रात में दादी मां बच्चों को सूई में धागा डालना सिखाती थीं। ऐसा बच्चों को चांदनी के महत्व को समझाने के लिए होता था। आज की पीढ़ी को चांदनी रात का अहसास नहीं है।

'घर वापसी' को 'गांधीवादी' कदम बता रहे आरएसएस के यह महाशय

... सुनिये, जरा मेरी भी
अफवाह फैलाने और फर्जी हाइपोथिसिस खड़ी करके उसे प्रचारित करने में वाकई आरएसएस का कोई तोड़ नहीं है। इस तरह की अपनी एक नई कवायद के तहत उसने 'घर वापसी' मुस्लिमों को हिन्दू धर्म में लाने की कवायद को सीधे महात्मा गांधी से जोड़ दिया है। संघ की नई दलील है कि 'घर वापसी' उसका नहीं बल्कि राष्ट्रपिता माने जाने वाले गांधी जी का विचार है।
आरएसएस के विचारक राकेश सिन्हा का कहना है कि आरएसएस द्वारा आयाजित किए जा रहे 'घर वापसी' के कार्यक्रमों की भले ही आलोचना की जा रही हो, लेकिन घर वापसी की वकालत सबसे पहले महात्मा गांधी ने की थी। गांधी जी ने अपने बड़े बेटे हरिलाल द्वारा मुस्लिम धर्म स्वीकार करने पर उसे पत्र लिखकर कहा था कि घर वापस आ जाओ। सिन्हा के मुताबिक बापू ने आरएसएस के बारे में कभी नकारात्मक बात नहीं की। संघ के वर्धा कार्यक्रम में तो वह बिना बुलाए पहुंच गए थे और सेवा कार्यों की प्रशंसा भी की।
संघ के विचारक राकेश सिन्हा ने यह बातें भोपाल में आयोजित आरएसएस के ही एक कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने अनेक प्रसंगों का जिक्र करते हुए संघ के प्रति गांधीजी के सकारात्मक विचारों पर जोर दिया।
सिन्हा ने कहा कि गांधी जी ने अपने बेटे की गलती पर अपने अखबार 'हरिजन' में दो बार लेख लिखे, लेकिन संघ के खिलाफ उन्होंने कभी एक लाइन भी लिखी। सिन्हा ने जोर देकर कहा कि घर वापसी को लेकर आज भले बातें बनाई जा रही हों लेकिन सबसे पहले घर वापसी के लिए गांधीजी ने अपने बेटे को प्रेरित किया था।

ज़ी एंटरटेनमेंट के सीईओ बने पीयूष

सुभाष चंद्रा की अगुवाई वाले ज़ी मीडिया समूह की सहायक कंपनी ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के कामकाज की कमान नए हाथों में आ गई है। पीयूष शर्मा को कंपनी का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया है।
जानकारी के मुताबिक उन्हें न्यू इंनीशिएटिव के तहत कंपनी के नए कारोबारी विस्तार के काम को गति देने के लिए इस पद पर बैठाया जा रहा है।
वह टीवी, वेब मोबाइब आदि सेक्शन को मजबूत करेंगे। पीयूष कंपनी के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका को रिपोर्ट करेंगे।

06 April 2015

गब्बर खुस हुआ, माधव को इनाम देगा !

 आरएसएस से भाजपा में इंपोर्ट किए गए राम माधव को मोदी की केंद्रीय कैबिनेट में जल्द ही जगह मिल सकती है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 अप्रैल को विदेश दौरे पर जाने से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। इस विस्तार के तहत राम माधव को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है।
राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि माधव को जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी के गठबंधन में उनकी अहम भूमिका के लिए मंत्री पद देकर पुरस्कृत किया जा रहा है।
चर्चा है कि कैबिनेट के विस्तार में तीन मंत्रियों को राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जा सकता है। इनमें मुख्तार अब्बास नकवी, राजीव प्रताप रूडी और मनोज सिन्हा का नाम लिया जा रहा है।
शिवसेना के अनिल देसाई और पीडीपी नेता व जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती को भी कैबिनेट में जगह मिलने की प्रबल संभावना है। वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के हाथ कॉरपोरेट मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी आ सकता है।
गौरतलब है ‌कि इससे पहले मोदी सरकार का  कैबिनेट विस्तार नवंबर महीने में हुआ था, जिसमें 21 नई चेहरों को मोदी सरकार में एंट्री मिली थी। मोदी मंत्रिमडंल में अभी 26 कैबिनेट, 13 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 26 राज्य मंत्री हैं।

आरएसएस के मंसूबों पर फिर गया पानी

 अजीम प्रेमजी जैसे साफ-सुथरी छवि और परोपकार के कामों से जुड़े उद्योग पति को मंच पर खड़ा करके एक उदारवादी चेहरा पेश करने के आरएसएस के मंसूबों पर पानी फिर गया।
विप्रो प्रमुख प्रेमजी ने संघ से जुड़े राष्ट्रीय सेवा भारती के शुरू हुए ‘राष्ट्रीय सेवा संगम’ नामक तीन दिवसीय सम्मेलन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच तो साझा किया, पर साथ ही स्पष्ट कर दिया कि किसी के मंच को साझा करने का मतलब उसकी विचारधारा को स्वीकारना नहीं है।
अपने संबोधन में प्रेमजी ने कहा कि भागवतजी ने जब मुझे यहां आने का निमंत्रण दिया, तो लोगों ने आशंका जताई कि यहां मेरा आना संघ की विचारधारा स्वीकार करना माना जाएगा। हालांकि मैंने यह राय नहीं मानी। मेरा मानना है कि किसी का मंच साझा करना उसकी विचारधारा को पूर्णत: स्वीकार करना नहीं है।
प्रेमजी ने कहा कि संघ के समाज सेवी संगठनों ने महान कार्य किए हैं और वह उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार से हर स्तर पर लड़ने और महिलाओं, बच्चों तथा वंचित लोगों के लिए उत्थान के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने भारत में शिक्षा का बजट बहुत कम होने पर निराशा भी जताई।
 गौरतलब ‌है कि इस कार्यक्रम में प्रेमजी के अलावा जीएमआर समूह के जीएम राव और एस्सेल ग्रुप के प्रमुख सुभाष चन्द्रा ने भी मंच साझा किया।

ये स्कीम आ गई, तो टीटी बाबू की काली कमाई पर लग जाएगा ताला

 जानकारी के मुताबिक रेलवे में एक ऐसी योजना अमल लाने की बात चल रही है, जो अगर लागू हो जाए तो यात्रियों को जहां काफी आराम मिलेगा, वहीं टीटी महाशयों की दो नंबर की आधी कमाई ही बंद हो जाएगी। इसी के चलते इस योजना के लागू हो पाने को लेकर अशंका भी जताई जा रही है।
मामला है यात्रियों को ट्रेन में ही रिजर्वेशन कराने की सुविधा देने का । इसके तहत आप सीधे ट्रेन में सवार होकर टीटीई से बर्थ रिजर्व करा सकेंगे। इसके लिए टीटीई को एक हैंड हेल्ड डिवाइस दी जाएगी। यह मशीन सीधे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) सर्वर से जुड़ी रहेगी, जिससे इससे खाली होने वाली सीटों की अपडेट जानकारी तुरंत टीटीई को मिलती रहेगी और वह कैंसिल आखिरी समय में होने वाले रिजर्वेशन की जगह दूसरे यात्रियों को बर्थ एलॉट कर सकेंगे।
प्रयोग के तौर पर यह सुविधा गरीब रथ में शुरू की गई है। योजना काफी सफल होती दिख रही है। रेलवे बोर्ड के आदेश मिलते ही सभी ट्रेनों में यह सुविधा शुरू की जा सकती है।
अबतक पास केवल रिजर्वेशन का चार्ट होता है। इस कारण टिकट कैंसिल होने पर खाली हुई सीट की जानकारी टीटीई को नहीं होती है। इसके कारण चलती ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं होता। आमतौर पर इन्ही खाली पड़ी बर्थ को तिगुने-चौगुने में जरूरतमंद लोगों को बेच कर टीटीई मोटी कमाई करते हैं।
बताया जाता है कि इस गोरखधंधे के तार ऊपर तक जुड़े होते हैं और हिस्सा टॉप तक जाता है। इसी कारण चलती ट्रेन में रिजर्वेशन की योजना के लागू हो पाने को लेकर शंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि रेल मंत्री सुरेश प्रभु की साफ-सुथरी और सुधारवादी छवि को देखते हुए कहीं न कहीं उम्मीद भी है कि शायद ऐसा हो ही जाए।

...फिर बोले काटजू

अपने बेबाक बयानों से अकसर विवादों में घिर जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्केंडेय काटजू ने एक बार  फिर मुंह खोल कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
इस बार काटजू ने गो हत्या पर लगे प्रतिबंध के विरोध में एक बयान दिया है। काटजू ने काटजू ने गोमांस पर बैन को राजनीतिक बताते हुए कहा कि मैं गोमांस खा चुका हूं, अगर दोबारा मौका मिलेगा तो जरूर खाऊंगा।
काटजू ने गो हत्या पर लगे प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति का निजी फैसला होता है कि वह क्या खाए और क्या नहीं। मैं अगर दूसरों को गो मांस खाने के लिए विवश नहीं कर सकता, तो कोई मुझे इस खाने से रोक कैसे सकता है?
काटजू ने अपने ब्लॉग में इसके समर्थन में पांच तर्क भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में लोग गो मांस खाते हैं तो क्या ज्यादातर पापी है? उन्होंने गोमांस को सस्ते प्रोटीन का अच्छा स्रोत बताते हुए कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में गोमांस की बिक्री पर बैन नहीं है। नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और केरल में गोमांस की बिक्री होती है।
काटजू का कहना है कि  मैंने गोमांस खाया है, लेकिन अपने परिवार के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसे खाना बंद कर दिया। मौका मिलने पर जरूर खाऊंगा। उनके मुताबिक गोमांस पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले दुनिया को हम पर हंसने का मौका देते हैं, क्योंकि इससे सामंती सोच सामने आती है।
 काटजू का यह भी कहना है कि गो हत्या के खिलाफ मुहिम चलाने वासों को उन गायों की भी फिक्र करनी चाहिए, जिन्हें ठीक से खाना नहीं मिलता है। कई बार गायों को कचरा खाते देखा जाता है। इतनी दुर्दशा होती है कि उनकी पसलियां तक नजर आती है। क्या यह गो हत्या से कम है?

05 April 2015

ज्यादा चैनल दिखाने के लिए टाटा ने अपग्रेड की अपनी टेक्नॉलजी

टीवी प्रसारण के क्षेत्र में डायरेक्ट टू होम (डीटूएच) सेवा देने वाली कंपनी टाटा स्काई के करीब 30 हजार ग्राहकों की सेवाएं उसके टेक्नॉलजी अपग्रेड कार्यक्रम के चलते प्रभावित हुई हैं। तकनीक को बेहतर बनाने का यह कार्यक्रम अभी दो दिन तक और चलेगा।
अपग्रेडेशन के तहत टाटा स्काई अपनी डेटा के कंप्रेशन तकनीक को अपग्रेड करने के साथ ही नेटवर्क के दायरे को भी बढ़ा रही है। इससे वह अपने ग्राहकों तक ज्यादा चैनल पहुंचा सकेगी।
कंपनी के सीईओ हरित नागपाल के मुताबिक अपग्रेडेशन के चलते टाटा स्काई के कल एक करोड़ से अधिक ग्राहकों में से करीब 25 हजार से 30 हजार ग्राहकों की सेवाओं में कुछ दिक्कतें आई हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले कंपनी ने मार्च 2011 में भी एक बार टेक्नॉलजी अपग्रेड किया था। उस समय इसके चलते 17 हजार ग्राहकों की सेवाएं प्रभावित हुई थीं।
नागपाल ने बताया कि इस बार हमने अपग्रेडेशन और इससे सेवा के प्रभवित होने की सूचना ग्राहकों को पहले से ही दे रखी है। हम पिछले दस दिनों से इसकी सूचना देने के लिए चैनलों पर स्क्रॉल चला रहे हैं। साथ ही तीन दिन से इसकी जानकारी देने वाला विज्ञापन भी दिखाया जा रहा है।

आईआरएस के सर्वे पर फिर छिड़ गई है रार

इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) के रीडरशिप सर्वे को लेकर एक बार फिर से विवाद खड़ा हो गया है। कई मीडिया घराने उसके ताजा सर्वे को झूठे आंकड़ों के दम पर पाठकों को गुमराह करने की कोशिश बता रहे हैं। आईआरएस 2014 सर्वे को फर्जी बताने वालों में जागरण और अमर उजाला शामिल है।
सर्वे के मुताबिक दैनिक जागरण ने सात फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है और इसकी पाठक संख्या 166.3 लाख पर पहुंच गई है। दैनिक भास्कर ने आठ फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज कर अपने पाठकों की संख्या 138.3 लाख कर ली है। अमर उजाला के पाठक दस फीसदी बढ़े हैं और इनकी संख्या 78 लाख पहुंच गई है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने पाठकों की संख्या पांच फीसदी बढ़ाई है और यह 75.9 लाख पहुंच गई है, जबकि द हिंदू ने दस फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है और इसके पाठकों की तादाद 16.2 लाख पर पहुंच चुकी है। साफ है, ये सारे अखबार अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान (दोनों अखबारों की पाठकों की तादाद चार फीसदी बढ़ी है) की तुलना में पाठकों की तादाद बढ़ाने में आगे रहे हैं। 
विरोध करने वाले समाचारपत्रों ने इसे खारिज करते हुए झूठ का पुलिंदा करार दिया था। एक बयान में इन अखबारों ने कहा था, कि इस सर्वेक्षण में भारी असमानताएं हैं।
सर्वेक्षण सामान्य तर्कों की कसौटी पर फेल साबित हुआ है। सर्वेक्षण के आंकड़े ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के प्रमाणित आंकड़ों से बिल्कुल उलट हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले उदाहरणों में ‘हिंदू बिजनेस लाइन’ से जुड़े आंकड़े थे। इनके हिसाब से ‘हिंदू बिजनेस लाइन’ के जितने पाठक चेन्नई में थे उसके तिगुने मणिपुर में थे। नागपुर से निकलने वाले अंग्रेजी अखबार हितवाद की प्रमाणित प्रसार संख्या 60,000 है, लेकिन सर्वेक्षण के मुताबिक इसका एक भी पाठक नहीं था।

वरिष्ठ खेल पत्रकार टीएन पिल्लै नहीं रहे

हैदराबाद के वयोवृद्ध खेल पत्रकार व संरक्षक टीएन पिल्लै का बीमारी के बाद शुक्रवार को देहांत हो गया। वह 86 वर्ष के थे। पिल्लै 1957 में डेक्कन क्रॉनिकल से जुड़े और वहीं से वे खेल संपादक के रूप में रिटायर हुए।
पिल्लै ने नई दिल्ली में 1982 के एशियाई खेलों, बीजिंग में 1990 एशियाड और 1987 में क्रिकेट विश्व कप को कवर किया। वह भारतीय खेल पत्रकार महासंघ के उपाध्यक्ष भी रहे और वे आंध्र प्रदेश खेल पत्रकार संघ के संस्थापक सदस्य में रहे।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने पिल्लै के निधन पर दुख जताते हुए उनके परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि पिल्लै ने खेल पत्रकार के रूप में कई युवाओं को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारतीय पत्रकार संघ (आईजेयू) ने भी पिल्लै की मृत्यु पर शोक जताया है।

उदार चेहरा पेश करने की कवायद में संघ

मदर टेरेसा द्वारा धर्मांतरण के लिए सामाजिक कार्य किए जाने के संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान की चारों ओर तीखी आलोचना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब कुछ उदारवादी चेहरा पेश करने की जुगत में दिख रहा है।
यह पहल दिल्ली के बाहरी इलाके में हो रहे संघ तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेवा संगम कार्यक्रम में देखी जा सकती है। कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसके उद्घाटन सत्र में देश के दिग्गज उद्योगपति अजीम प्रेमजी और जीएम राव के अलावा फिल्म निर्माता सुभाष घई के भी मुख्य अतिथि के तौर पर आने की संभावना है।
इन तीन लोगों को मंच पर पेश करके संघ यह दिखाना चाहता है कि वह अब कट्टर हिंदूवाद के युग से निकल कर उदारवाद की ओर कदम बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम के जरिए आरएसएस अपने और अपने सहायक संगठनों के सेवा कार्यों को समाज के सामने रखते हुए यह जताने की कोशिश करेगा कि भारत में सामाजिक कार्य विदेशी मिशनरियों की देन नहीं है, बल्कि दूसरे संगठन भी इस क्षेत्र में बिना किसी लोभ के काफी काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता माता अमृतानंदमयी और संघ प्रमुख मोहन भागवत करेंगे। संघ का यह आयोजन चार साल बाद कर रहा है और इस बार यह काफी बड़े स्तर पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में 836 संगठनों से जुड़े चार हजार प्रतिनिधि इसमें भाग ले रहे हैं।

दायरा बढ़ाने के लिए मोबाइल ऐप्स का सहारा ले रहा आरएसएस

अपनी हिंदूवादी विचारधारा, खाश वेश-भूषा और कार्यशैली के लिए जाना जाने वाला आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन दिनों अपना चेहरा और तौर-तरीके बदलने की कवायद में जुटा है।
संघ अब सूचना क्रांति की नई तकनीक को बढ़ाकर अपना दायरा बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। इसके तहत आरएसएस ने आधा दर्जन से अधिक मोबाइल एप्स लांच कर तेजी से लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। इसमें आरएसएस मोबाइल, श्री गुरुजी, अमृत वचन, स्मरणीयम्‌, वंदना, प्रेरणा सुमन, अर्चना आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही संघ की शाखाओं में स्वयंसेवकों को अब मोबाइल एप्स की भी जानकारी देनी भी शुरू कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि जन लोकपाल बिल को लेकर हुए अन्ना आंदोलन को मिले भारी जन समर्थन और इसके बाद बनी आम आम आदमी पार्टी के तेजी से फैले दायरे में सोशल मीडिया की व्यापक भूमिका ने संघ को काफी प्रभावित किया है। इसे देखते हुए ही परंपरागत ढर्रे पर चलने वाला यह संगठन अब सोशल मीडिया और नई डिजिटल प्लेटफार्म पर काफी ध्यान दे रहा है। इसके जरिए आरएसएस युवा वर्ग में मजबूत पकड़ बनाना चाहता है, जिसके लिए वह मोबाइल एप्स का सहारा ले रहा है।
बताया जा रहा है कि आरएसएस को 2014 के लोकसभा चुनाव में इस बात का अंदाजा हो गया है कि संचार तकनीक के जमाने में सोशल मीडिया की कितनी ताकत रखता है।  इसलिए वह भी मोबाइल ऐप्स को अपना रहा है। आरएसएस के मोबाइल एप में शामिल प्रेरणा सुमन में देश के महान विभूतियों के जीवन का वर्णन हैं। इसमें आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार से लेकर संघ के तमाम सर संघ चालकों की बाबत पूरी जानकारी है।
इसके साथ ही देश के स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों की भी जीवनी दी गई है। इनमें गुरुजी, संघ के द्वितीय सरसंघ चालक  माधव सदाशिव राव गोलवलकर का जीवन प्रसंग है।
इसी तरह आरएसएस मोबाइल, शाखाओं की लोकेशन बताता है। अमृत वचन हिंदुत्व की अवधारणा से भरा पड़ा है। वंदना ऐप में वैदिक मंत्र और उनका हिंदी अनुवाद है। स्मरणीयम्‌ में दोहे, श्लोक आदि हैं।

ऐसी खबरें क्यों शामिल नहीं हो पातीं मीडिया की हेडलाइंस में

...जरा सोचिए जनाब
दंगे, लव जिहाद जैसी खबरें और सामाजिक समरसता को बिगाड़ने वाले रामजादे-हरामजादे जैसे बयान बड़ी आसानी से मीडिया की सुर्खियों में छा जाते हैं, पर देश की गंगा-जमनी तहजीब को बढ़ावा देने वाली कोई घटना या प्रयास हो तो मीडिया उसे कोई खास तवज्जो नहीं देता। कुछ ऐसा ही पहल बनारस में हो रही है, जिसे मुख्य धारा की मीडिया ने उतना हाइलाइट नहीं किया, जितना कि किया जाना चाहिए था।
यह खबर है दुनिया भर में अपनी मौसिकी के लिए मशहूर पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली द्वारा 8 अप्रैल को वाराणसी में शुरू हो रहे वार्षिक संगीत महोत्सव में हिस्सा लेने की। अब आप कहेंगे कि इसमें क्या खास बात है भला, गुलाम अली तो अकसर ही भारत के अलग-अलग शहरों और आयोजनों में गाते रहे हैं। पर इस कार्यक्रम में खास है उसका वेन्यू। गुलाम अली बनारस के मशहूर संकट मोचन मंदिर में अपनी प्रस्तुति देंगे। एक और खास बात यह है कि गजलों के लिए मशहूर गुलाम अली वहां गजल नहीं गाएंगे, बल्कि "ठुमरी" और "चैती" पेश करेंगे। इससे भी बड़ी बात यह है कि जानकारी के मुताबिक गुलाम अली ने खुद मंदिर के महंत से संपर्क कर समारोह में गाने की पेशकश की और वह इस कार्यक्रम के लिए एक भी पैसा नहीं ले रहे हैं।
गौरतलब है कि यह वही संकट मोचन मंदिर है जिसे पांच-छह साल पहले आतंकियों ने सीरियल ब्लास्ट के जरिए दहला दिया था।
मंदिर के महंत और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आईआईटी के प्रोफेसर विश्वमबर नाथ मिश्रा ने बताया कि यह पहला मौका होगा जब कोई पाकिस्तानी गायक संकट मोचन मंदिन में प्रस्तुति देगा। संगीत समारोह 4 अप्रैल से शुरू हो रहे मंदिर के वार्षिक समारोह का आखिरी कार्यक्रम होगा। मंदिर प्रशासन ने वाराणसी से सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी न्योता दिया है।
कार्यक्रम में पंडित बिरजू महाराज, हरिप्रसाद चौरासिया, सोनल मानसिंह, हशमत अली खान, उस्ताद अमजद अली खान, उनके दोनों बेटों अमान, अयान सहित कुल 50 लोग अपनी प्रस्तुति देंगे।

मणिपाल विश्वविद्यालय के न्यूज लेटर एमयूजे टाइम्स का विमोचन

राजस्थान विश्वविद्यालय के जन संचार केंद्र के रजत जयंती समारोह के क्रम में आयोजित किए जाने वाले अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन में मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर के जनसंचार विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ जर्नलिज्म एंड मॉस कम्यूनिकेशन) की ओर से निकाले जा रहे न्यूज लेटर एमयूजे टाइम्स का विमोचन भी किया गया। विमोचन एमयूजे के प्रेसिडेंट प्रो. संदीप संचेती, प्रो.कमल दीक्षित, प्रो. मृणाल चटर्जी, प्रो.संजीव भानावत, प्रो.उज्जवल चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार कल्याणसिंह कोठारी ने किया। इस मौके पर एमिटी विश्वविद्यालय, मुंबई के डीन प्रो.उज्ज्वल चौधरी ने अगले अखिल भारतीय सम्मेलन की मेजबानी करने का प्रस्ताव भी रखा।
कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारिता की भाषा, विज्ञापन, सिनेमा, न्यू मीडिया, वेब पत्रकारिता और संचार माध्यमों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर शोध पत्र पढ़े गए। मीडिया शिक्षकों के सम्मेलन का आयोजन मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर, स्वयंसेवी संगठन लोक संवाद तथा सोसायटी ऑफ मीडिया इनीशिएटिव फॉर वेल्यूज, इंदौर के सहयोग से किया जा रहा है।

03 April 2015

यात्रियों को पिज्जा परोसने की तैयारी में भारतीय रेल

ट्रेनों में मिलने वाला बोरिंग खाना से बेहतर लगता है कि भूखे ही सफर गुजार देने को आप बेहतर समझते हैं या फिर स्टेशनों पर खाना खाने में ट्रेन छूट जाने का डर सताता है, तो आपकी दिक्कतें जल्द खत्म हो सकती हैं। पिज्जा के शौकीनों की तो समझिए मौज ही हो जाएगी।

दरअसल भारतीय रेल में खानपान की सेवा देने वाली कंपनी आईआरसीटीसी अब ट्रेनों में पिज्जा हट और केएफसी के लजीज व्यंजन परोसने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बातचीत चल रही है और इसके सफल रहने पर जल्द ही आपको ट्रेन में सफर के दौरान पिज्जा खाने का मजा मिल सकता है। 

आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग के तहत उपलब्ध कराए जा रहे व्यंजनों की सूची में अब नामी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के व्यंजनों को भी शामिल कराने की कोशिश चल रही है। इस समय डोमिनोज पिज्जा के उत्पाद ई-कैटरिंग सेवा में मिल रहे हैं। अब कंपनी से जुड़ने के लिए पिज्जा हट और केएफसी और यम जैसी कंपनियों ने भी इच्छा व्यक्त की है। यदि बातचीत सफल हुई, तो शीघ्र ही इनके व्यंजन भी आईआरसीटीसी के ई-कैटरिंग सूची में शामिल हो जाएंगे।

गौरतलब है कि रेल मंत्रालय में बिना पेंट्री कार वाली 120 ट्रेनों में ई-कैटरिंग सेवा चलाने का अधिकार आईआरसीटीसी को दिया है। इसके लिए ग्राहक चाहे, तो इंटरनेट पर बुकिंग कर सकते हैं या फिर टोल फ्री नंबर 18001034139 या 0120 4383892-99 पर फोन कर बुक कर सकते हैं। इन गाड़ियों को रेलवे कम महत्वपूर्ण मानता और पेंट्री कार की व्यवस्था नहीं होने की वजह से इसमें यात्री भी खाने-पीने के सामान के लिए रोड साइड वेंडर पर ही आश्रित होते हैं। अब ई कैटरिंग की व्यवस्था हो जाने पर इसे काफी पसंद किया जा रहा है।

कॉल ड्राप की बढ़ती शिकायतें टेली कंपनियों पर पड़ेंगी भारी

कॉल ड्रॉप यानी बीच में फोन कट जाने की लगातार बढ़ती शिकायतें अब टेलीकॉम ऑपरेटर कंपनियों पर भारी पड़ सकती हैं। सरकार ने इस पर तेवर सख्त कर दिए हैं। संचार मंत्रालय ने इसे लेकर सभी टेलीकॉम कंपनियों को चेतावनी दी है।

मंत्रालय ने कंपनियों को चेताया है कि कॉल ड्राप की शिकायतें अगर कम नहीं हुईं और सेवा की क्वालिटी नहीं सुधरी तो सरकार कार्रवाई के लिए इस मामले को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को सौंप देगी।
पिछले कई महीनों से मंत्रालय को कॉल ड्राप की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक कई शहरी इलाके में टेलीकॉम टावर को कम किए जाने की वजह से कॉल ड्राप की शिकायतें बढ़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक कॉल ड्राप का कारोबार कई सौ करोड़ रुपये का हो गया है और जान बूझ कर कॉल ड्राप कराई जाती है।

मंत्रालय का कहना है कि उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवा के लिए सरकार जिम्मेदार है। इसलिए सरकार इस मामले को लेकर काफी गंभीर है। मंत्रालय का यह भी कहना है कि स्पेक्ट्रम नीलामी की वजह से उपभोक्ताओं को लगने वाली कॉल दर में मात्र 1.3 पैसे प्रति मिनट की बढ़ोतरी होगी।

ऑडी के शौकीनों के लिए इस साल रहेगी बहार, आएंगी 10 नई कारें

लक्जरी कारें बनाने वाली जर्मनी की कंपनी ऑडी भारत में इस साल अपने 10 नए मॉडल लांच करेगी।

कंपनी लगातार दो साल से पहले स्थान पर कब्जा बनाए हुए है। चार छल्लों वाले इस ब्रांड ने अप्रैल 2014 से मार्च 2015 के दौरान 11.51 प्रतिशत की वृद्धि कर 11,292 कारें बेचीं ।

ऑडी इंडिया के प्रमुख जो किंग ने कहा कि लगातार दो वर्ष लक्जरी कार बाजार में लीडरशिप बरकरार रख कर हम बहुत खुश हैं, जबकि पिछले वित्त वर्ष में हमने केवल एक बड़ा लांच ऑडी ए3 का ही किया था। अब 2015 में हम 10 नई कारें लांच करेंगे जिनमें ऑडी टीटी और नई ऑडी क्यू3 जैसे मॉडल बहुप्रतीक्षित मॉडल भी शामिल होंगे।

बाजार में अग्रणी स्थिति और रिकॉर्ड बिक्री के साथ वर्ष 2014 का समापन करने के बाद ऑडी ने सबसे शक्तिशाली ऑडी मॉडल, सीमित संस्करणों वाली, ऑडी आर8 एलएमएक्स को पेश किया। इस साल कंपनी गुवाहाटी, रांची और बंगलूरू में नए शोरूम तथा कोलकाता में दूसरी सर्विस फैसिलिटी भी खोल चुकी है।

भारत में उपलब्ध ऑडी की मॉडल रेंज में ऑडी ए3 सिडान, ऑडी ए3 कैब्रियोले, ऑडी ए4, ऑडी ए6, ऑडी ए7 स्पोर्टबैक, ऑडी ए8एल, ऑडी क्यू3, ऑडी क्यू5, ऑडी क्यू7, ऑडी एस4, ऑडी एस6, ऑडी आरएस5 कूपे, ऑडी आरएस7 स्पोर्टबैक, ऑडी आर8, ऑडी आर8 स्पाइडर, ऑडी आर8 वी10 प्लस और ऑडी आर8 एलएमएक्स शामिल हैं। ये मॉडल पूरे देश में उपलब्ध हैं।

मोबाइल कंपनी की तरह अब बदल सकेंगे डीटीएच ऑपरेटर भी

मोबाइल ऑपरेटर की तरह अब आप अपने केबल ऑपरेटर को भी बदल सकेंगे।

संचार क्षेत्र की नियामक संस्‍था टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने मोबाइल पोर्टेबिलिटी की ही तर्ज पर आज उपभोक्ताओं को डीटीएच सेवा देने वाली एक कंपनी से दूसरी चुनने की प्रक्रिया आसान करने के लिए तथा संचालकों द्वारा शुल्क वसूली में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए नियमों का खाका तैयार किया है.

ट्राई ने एक ‘टैरिफ ऑर्डर’ (टीओ) के तहत डीटीएच संचालकों द्वारा दिये जाने वाले कस्टमर प्रमिसिस इक्विपमेंट (सीपीई) या सेट टॉप बॉक्स के संबंध में नियम निर्धारित किर ‌दिए हैं।

ट्राई ने यहांकहा कि यदि कोई उपभोक्ता एक डीटीएस संचालक से दूसरे की सेवा की ओर जाना चाहता है तो फिलहाल उसे दूसरे संचालक के सीपीई का खर्च उठाना पड़ता है।

सीपीई को व्यावसायिक रूप से प्रयोग में लाने की नई रूपरेखा के तहत अगर उपभोक्ता किसी वजह से दूसरे डीटीएच संचालक की सेवाओं का लाभ उठाना चाहते हैं तो उन्हें सेवा छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा।

कमाई बढ़ाने के लिए रेलवे अपनाएगी ब्रांडिंग का फंडा


वित्तीय संकट का रोना रोने वाली भारतीय रेलवे अपनी कमाई बढ़ाने के लिए अब नया फंडा अपनाने वाली है। यह तरकीब हैं ब्रांडिंग यानी विज्ञापनों के सहारे कमाई करने की।

इसके तहत रेलवे ट्रेनों, कोचों, स्टेशनों और यहां तक कि बेडिंग की ब्रैंडिंग की योजना को अंतिम रूप दे रही है। रेलवे को इससे 9,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। हालांकि यह योजना कोई नई नहीं है। करीब पांच साल पहले यूपीए सरकार के समय ही कुछ ट्रेनों पर विज्ञापन प्रदर्शित करने के साथ ही इन ट्रेनों के नाम में प्रायोजक कंपनियों का नाम जोड़ने की योजना थी। पर प्रायोगिक स्तर के बाद इसे ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।

अब रेलवे एक बार फिर नए सिरे से इस कवायद में जुट गई है। जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैफिक) अजय शुक्ला की अगुवाई में एक टास्क फोर्स इस मामले पर 30 अप्रैल तक रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रचार नीति और इसे लागू करने के तरीकों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

हाल ही में इंजिनियरिंग कंसल्टेंसी राइट्स (आरआईटएस) लिमिटेड के एक अध्ययन में यह बात सामने आने के बाद कि ब्रैंडिंग से रेलवे को 9,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है, रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने टास्क फोर्स का गठन किया था।जानकारी के मुताबिक रेल मंत्री कॉर्पोरेट ब्रैंड्स को स्टेशनों और ट्रेनों के नाम के लिए बोली लगाए जाने की छूट दिए जाने के विचार से सहमत हैं।

एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि रेलवे सिर्फ 26 राजधानी, 20 शताब्दी और 32 दुरंतो ट्रोनों के विज्ञापन बेचकर ही सालाना करीब 780 करोड़ रुपये कमा सकती है।

गीता ज्ञान में अव्वल रही एक मुस्लिम लड़की


12 साल की मरियम सिद्दीकी ने हिंदू धर्म ग्रंथ भगवद्गीता पर आधारित प्रतियोगिता में टॉप करके सबको हैरान कर दिया। मरियम ने इस्कॉन की ओर से आयोजित किए गए 'गीता चैंपियंस लीग कॉन्टेस्ट' में 3,000 प्रतियोगियों को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।

छठी क्लास में पढ़ रही मरियम वैसे स्कूली पढ़ाई में भी अव्वल है और वह अपनी क्लास की टॉपर्स में शुमार हैं।इस टेस्ट में बच्चों के गीता ज्ञान को परखने के लिए इस पर अधारित प्रश्न पूछे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा सही उत्तर देकर मरियम ने बाजी मार ली।

दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली मरियम ने यह कारनामा महज एक महीने  बीता पढ़कर कर दिखाया। कॉस्मोपॉलिटन हाई स्कूल में पढ़ने वाली मरियम ने इस्कॉन की ओर से दी गई किताबें एक महीने तक पढ़ीं और अंग्रेजी में टेस्ट दिया।

मरियम का कहना है कि मैं दुनिया के विभिन्न धर्मों के बारे में जितना पढ़ती हूं, मेरे मन का यह विश्वास उतना ही गहरा होता जाता है कि दुनिया का सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है।अवॉर्ड जीतने के बाद मरियम ने बताया कहा कि मेरी धर्मों में हमेशा से ही दिलचस्पी रही है और अकसर अपने खाली समय में मैं धार्मिक किताबें पढ़ती हूं। इसलिए जब टीचर ने इस कॉन्टेस्ट के बारे में बताया, तो मुझे लगा कि यह गीता पढ़ने और समझने का अच्छा मौका होगा।

मरियम ने बताया कि उनके घरवालों का रवैया भी इस सबके प्रति काफी सकारात्मक है और माता-पिता ने ‌गीता ज्ञान की प्रतियोगिता में भाग लेने को लेकर उनका मनोबल बढ़ाया।

भारत में ओलंपिक कारने की तैयारी में मोदी


इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियाई खेलों की यादें आज तक उस दौर लोगों के दिलों में देश में हुए खेलों के अब तक के सबसे बड़े इवेंट के रूप में बसी हुई हैं। मोदी सरकार अब इससे भी एक कदम आगे निकल कर भारत में ओलंपिक कराने की सोच रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी बाबत अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के प्रमुख थामस बाक को इस महीने बैठक के लिए आमंत्रित किया है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान मोदी ओलंपिक 2024 की दावेदारी पेश करने को लेकर बाक के साथ चर्चा करेंगे। बैठक के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

आईओसी अध्यक्ष बनने के बाद बाक की यह पहली भारत यात्रा होगी।तलवारबाजी के पूर्व ओलंपियन जर्मनी के बाक को स्विट्जरलैंड के लुसाने में आईओसी मुख्यालय में खेल सचिव अजित शरण और भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एन रामचंद्रन ने निमंत्रण सौंपा है। आज बाक के आईओए के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करने की भी उम्मीद है।

आईओए सूत्रों के मुताबिकसरकार बाक को यह बताना चाहता है कि वह 2024 ओलंपिक खेलों की दावेदारी को लेकर इच्छुक है, लेकिन फिलहाल औपचारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं देना चाहता।

हालांकि रामचंद्रन ने पुष्टि की कि  मोदी इस महीने बाक से मिलेंगे, पर उन्होंने 2024 ओलंपिक खेलों के लिए भारत की दावेदारी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।रामचंद्रन ने बताया कि आईओए और भारत सरकार ने आईओसी प्रमुख डा. थामस बाक को भारत में खेलों के विकास पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री के साथ इस महीने के आखिरी हफ्ते में बैठक के लिए आमंत्रित किया है।

बाक को दिए गए निमंत्रण में अस्थाई तौर पर बैठक की तारीख 27 अप्रैल का जिक्र है, लेकिन रामचंद्रन ने कहा कि तारीख पर फैसला आईओसी और प्रधानमंत्री कार्यालय को करना है।

चाय बेचते-बेचते वेब डवलपर बन गया राजू


चाय बेचने वाले इन दिनों देश में बड़े-बड़े कमाल कर रहे हैं। एक समय में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने की बात कहने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए। अब मुंबई में चाय बेचने वाले एक लड़के ने भी एक अच्छा खासा कारनामा कर दिखाया है।

14 साल की उम्र में झारखंड से मुंबई आया राजू यादव उसी कंपनी में वेब डेवलपर बन गया है, जहां वह कभी चाय पहुंचाया करता था। हालांकि राजू के लिए यह सफर आसान कतई नहीं रहा पर, मेहनत और लगन के साथ-साथ सीखने की इच्‍छा उसके लिए वरदान साबित हुई। 

मुंबई आने के बाद राजू के जीवन की शुरुआत एक छोटे से होटल में काम करने से हुई। यहां वह चाय पहुंचाने का काम करता था। साउथ मुंबई के चीरा मार्केट के स्थित दफ्तरों में चाय का काम उसे दिया गया था। चाय की दुकान पर उसको हर महीने पगार के रूप में केवल 2,000 रुपये थे। जिन ऑफिसों में वह चाय पहुंचाता था, उनमें से एक शादीडॉट कॉम का आफिस था यहीं 6 महीने बाद उसे असिस्‍टेंट की जॉब मिली। पर उसकी तरक्की का सफर यहीं नहीं रुका धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर वह इस कंपनी में वेब डेवलपर बन गया। नौकरी के साथ ही राजू ने वेब डेवलेपमेंट भी सीख लिया और शादीडॉट कॉम में वैकेंसी निकलते ही एप्‍लाई कर दिया। कंपनी ने इंटरनल रिव्‍यू प्रोसेस के बाद राजू को वेब डेवलपर के रूप में प्रमोट कर दिया।

ऑफिस में काम राजू ने पढ़ाई जारी रखी और 2006 में उन्‍होंने पढ़ाई के लिए 3 महीने की छुट्टी लेकर हाईस्‍कूल का एग्‍जाम दिया। इसमें वह अच्‍छे नंबरों से पास हुआ। इसके बाद इंटरमीडिएट किया और फिलहाल मुंबई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहा है।

02 April 2015

'स्‍क्रैपबुक' के जरिये फेसबुक पर बनाएं बच्चों का फोटो प्रोफाइल


फेसबुकियों के लिए एक अच्छी खबर है कि बच्चों की तस्वीरें अपलोड करने के ‌लिए अब उन्हें किसी नियम के उल्लंघन का जोखिम नहीं उठाना होगा।

फेसबुक ने 'स्‍क्रैपबुक' नाम से एक नया फीचर शुरू करके यह मुश्किल आसान कर दी है। 'स्‍क्रैपबुक' की मदद से अब आप 13 साल से कम उम्र के बच्चों की तस्वीरें फेसबुक पर एक साथ एक ही जगह अपलोड कर सकते हैं।

गौरतबल है कि नियमतः 13 साल से नीचे की उम्र के बच्चे फेसबुक में साइन-अप नहीं कर सकते। इसलिए उन्हें टैग भी नहीं किया जा सकता।  फेसबुक ने यूजर्स की इस परेशानी को समझते हुए ही स्क्रैपबुक फीचर लांच किया है। यह फीचर एंड्रायड आईओएस और डेस्कटॉप पर काम करता है। इसके जरिए प्राइवेट एल्बम के रूप में बच्चों की तस्वीरें फेसबुक दोस्तों के साथ शेयर की जा सकती हैं।

फेसबुक ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि स्क्रैपबुक फीचर अभिभावकों  को 13 साल से नीचे के बच्चों की तस्वीरें इकट्ठा कर एक केन्द्रीय स्थान पर आर्गेनाइज करने की अनुमति देता है। इसमें आप अपने बच्चों के लिए एक खास टैग बना सकते हैं।

स्क्रैपबुक में केवल वही पैरेंट्स फोटो डाल सकते हैं जो फेसबुक के रिलेशनशिप सेक्शन से जुड़े होगें या फिर इसके लिए प्राइवेसी सेटिंग चेंज कर सकते हैं। फेसबुक के इस फीचर से स्क्रैपबुक बच्चों के फोटो की एक पूरी प्रोफाइल में बदल जाएगी।

अधिकारी ने बताया कि पैरेंट्स स्क्रैपबुक को नि‍जी रख सकते हैं। वे इसे हटाना चाहते हैं तो हटा भी सकते हैं या  सार्वजनिक करने का ऑप्‍शन भी चुन सकते हैं। इस तरह स्क्रैपबुक पर आपका पूरा नियंत्रण होगा।

वॉट्सएप पर बिना इनवाइट या डाउनलोडिंग कीजिए वॉइस कॉलिंग


दुनिया में इस समय सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जा रही मैसेंजर सर्विस वॉट्सएप का वॉइस कॉलिंग फीचर सभी यूजर के लिए शुरू हो गया है। वाइस कॉलिंग शुरू करने के लिए अबतक यूजर्स को वेबसाइट से एप्लीकेशन डाउनलोड करना पड़ रही थी।
इसके अलावा कुछ यूजर 'इनवाइट' ऑप्शन के जरिए इस फीचर को शुरू करने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे लोगों के लिए खुशखबरी है कि अब यह सेवा बिना 'इनवाइट' के ही शुरू हो गई है।

इसका इस्तेमाल करने के लिए आपको अब बस अपने फोन में वॉट्सएप के वर्जन को अपडेट करना होगा।गौरतलब है कि इंटरनेट डेटा पैक के खर्चे में वॉट्सएप कॉलिंग के जरिए देश-दुनिया में कहीं भी कॉल किया जा सकता है। इसमें औसतन 1 मिनट बात करने पर 1 एमबी डेटा खर्च होता है।

टेलीकॉम कंपनियों के 2जी और 3जी डेटा पैक के अनुसार कॉलिंग की दर 80 पैसे प्रति मिनट से लेकर 3 रुपए प्रति मिनट तक हो सकती है। गौरतलब है कि वॉट्सएप ने कुछ समय पहले वॉइस कॉलिंग को परीक्षण के तौर पर शुरू किया था। टेस्टिंग के तहत कुछ यूजर्स को ये फीचर दिया गया था। जिन यूजर के पास कॉलिंग फीचर था, वह अपने अन्य वॉट्सएप फ्रेंड्स को कॉल कर इनवाइट भेज सकते थे।

हालांकि ये इनवाइट सिस्टम सभी यूजर्स के लिए काम नहीं कर रहा था। नए अपडेशन के बाद यह फीचर सभी एंड्रॉयड मोबाइल पर दे दिया गया है, लेकिन अभी ये आईफोन और विंडोज फोन पर उपलब्ध नहीं है।

बस छह कदम दूर है वाइस कॉलिंग
1. पहले से वॉट्सएप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो गूगल प्ले स्टोर से इसे अपडेट करें
2. इससे वॉट्सएप पर कॉल की सुविधा आ जाएगी
3. अपडेट करने के बाद अपने वॉट्सएप को फिर से चलाएं।
4. इससे वॉट्सएप स्क्रीन पर चैट और कॉल का अलग-अलग ऑप्शन आ जाएगा
5. अब जिस तरह आप चैट करते हैं, उसी तरह वीडियो कॉल भी कर सकेंगे
6. बस फोन बने लोगो पर क्लिक कीजिए और हो जाएगा वीडियो कॉल

राजन बाबू फिर ले बैठे जेटली से पंगा


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन जाने-अनजाने अकसर कुछ ऐसा बोल जाते हैं, जिससे उनकी गवर्नरी कई बार खतरे में पड़ती दिखने लगती है।
इसी सिलसिले को जारी रखते हुए राजन एक बार फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली से पंगा ले बैठे हैं। बात आरबीआई की 80वीं सालगिरह पर आयोजित समारोह की है। इसमें अपने भाषण में वह ऐसी बात बोल बैठे जो जेटली के स्टैंड से ठीक विपरीत बैठती है।

समारोह में राजन ने बैंकों को इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को दिए जा रहे भारी-भरकम कर्जों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि बैंकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह इन्फ्रा सेटर को इतना लोन न दे बैठें कि खुद उनकी वित्तीय स्थिरता ही पर संकट आ जाए। राजन ने कहा कि देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को वित्तीय साधनों की काफी जरूरत है, पर कई बैंक पहले ही इस सेक्टर को काफी ज्यादा लोन दे चुके हैं।

इन्फ्रा सेक्टर से जुड़े कई बड़े कॉरपोरेट घराने पहले ही काफी बड़े लोन ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के वित्त पोषण पर दिया जा रहा जोर कहीं देश की वित्तीय स्थिरता पर भारी न पड़ जाए, जोकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।

राजन ने यह बात बैंकों की बढ़ती जा रही गैरनिष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के संदर्भ में कही। बैंकों का एनपीए दिसंबर 2014 में बढ़कर तीन लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है। मजे की बात यह है कि राजन के भाषण के वक्त इन्फ्रासेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर देने वाले पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों ही मौजूद थे।
गौरतलब है कि आरबीआई गवर्नर का यह बयान वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के वित्त पोषण पर जोर दिए जाने के विपरीत है। जेटली इस साल बजट में इन्फ्रा सेक्टर के लिए आवंटन को बढ़ा कर 70 हजार करोड़ रुपये कर दिया है।

इसके अलावा वह इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने की वकालत भी बार-बार करते रहे हैं।

गिरिराज की सोच से ज्यादा मीडिया के चरित्र पर उंगली उठाती है यह टिप्पणी


हम नहीं सुधरेंगे ...
भाजपा के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन चल रहा है, पुतले जल रहे हैं। न्यूज चैनल पर संजय निरूपम चीख रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के घर के बाहर कांग्रेस की महिला ब्रिगेड धरना दिए बैठी है। सारा बवाल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर दिए उनके बयान को लेकर है।

सोनिया की ‘गोरी चमड़ी’को लेकर जो बात उन्होंने कही उसे लेकर कांग्रे‌सियों का गुस्सा उफान पर है। बात है भी आक्रोश जगाने वाली।

गिरिराज चमड़ी के रंग को लेकर जो बात कह रहे हैं, उसे सभ्य-शालीन तो कतई नहीं कहा जा सकता। इसे किसी भी तरह से औचित्यपूर्ण ठहराना भी मुनासिब नहीं होगा, इसका समर्थन करना तो खुद को भी मोदी मंत्रीमंडल के उन साधु-साध्वियों और मुंहजोर मंडली की उस कतार में ला खड़ा करना होगा, जो जब-तब कुछ न कुछ अंट-शंट बकती रहती है और अनुशासन, सुशासन का दम भरने वाले मोदी तमाशा देखते रहते हैं। 56 इंच का सीना एक इंच भी सिकुड़ता नहीं चहेतों की इन कारगुजारियों पर। नमो की इस मौन स्वीकृ‌ति के चलते ही एक के बाद एक बवालिया बयान भाजपा के खेमे से आते रहते हैं।

गिरिराज के हालिया बयान को भी मैं इसी कड़ी में देखता हूं। हालांकि इस मामले में एक दूसरा पहलू भी काफी अहम नजर आता है, जिसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह बात है मीडिया के खुद के गिरते कैरेक्टर की। मेरी समझ में गिरिराज प्रकरण उनकी सोच से ज्यादा गहरे सवाल उठाता है मीडिया के बीमार होते जा रहे चरित्र पर। ध्यान से देखिये तो गिरिराज के जिस बयान को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया है, वह वास्तव में कोई ‘बयान’ नहीं है। गिरिराज आपसदारी में बैठे अनौपचारिक रूप से कुछ बातचीत कर रहे हैं। यह सबकुछ पूरी तरह से ऑफ दि रिकॉर्ड है और हम सब जानते हैं कि आपसी बातचीत में लोग किस-किस तरह की चर्चाएं करते हैं और उसकी भाषा शैली कैसी होती है।

गिरिराज कह रहे हैं कि राजीव गांधी अगर किसी नाइजीनियन महिला से शादी करते तो क्या उसे भी कांग्रेस इस तरह सिर-माथे बैठाती? क्या उसे भी ऐसा ही रुतबा मिलता? बात सही या गलत होने को लेकर बेशक सवाल उठ सकते हैं, पर इसे एक सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। देश-दुनिया और समाज की जो सोच है उसमें एक सवाल तो यह बनता है। इसके साथ सवाल यह भी उठता है कि मीडिया की ऐसी क्या मजबूरी थी कि पत्रकारिता के सारे नियम-कायदों और एथिक्स पर धूल डालते हुए इसे बुलेटिनों में धड़ाधड़ चला दिया गया।

चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज तक चली इसकी और फिर प्रिंट ने मीडिया भी इलेक्ट्रानिक माध्यम की अनुगामी बनकर पन्ने रंग डाले इसपर। आज के दौर की पता नहीं, पर भई हमने जो पत्रकारिता पढ़ी उसमें किसी की ऑफ दि रिकॉर्ड बात को उजागर करना अपराध बताया गया था, जब तक कि ऐसा करना राष्ट्र हित या समाज हित में न हा। इस प्रकरण में कौन सा राष्ट्र हित या समाज हित जुड़ा है बहुत प्रयास करके भी समझ नहीं पा रहा हूं। यह कोई पहला मौका नहीं है, जब टीवी चैनलों ने ऑफ द रिकॉर्ड कही जाने वाली किसी मामूली सी बात को सुर्खियां बना कर परोस दिया हो।

इससे पहले अग्निवेश और यूपी के बड़बोले मंत्री आजम खान की भी कुछ ऐसी ही बातें ‘खबर’ बन चुकी हैं। चैनलों की यही करतूत रही तो आने वाले दिनों में लोग कैमरे वालों को आसपास फटकने भी नहीं देंगे। अपने मतलब की बात कहने या बयान देने के बाद कैमरामैनों को तुरंत खदेड़ दिया जाएगा वहां से।

टीवी चैनलों के संपादक इस बात पर गौर क्यों नहीं करते भला। क्या उनके पास आइडियाज और कंटेंट की इतनी कमी हो गई है कि ऑफ दि रिकॉर्ड बातों को एजेंडा बनाया जा रहा है, वह भी तब, जबकि इस यह देश या समाज का हित करने वाली नहीं, बल्कि गुस्से या आक्रोश को उबाल देने वाली हो। क्या इस अंधी दौड़ से बचा नहीं जा सकता?

वर्ल्ड कप गया, अब चढ़ने वाला है आईपीएल-8 का बुखार

क्रिकेट हमारे देश में एक बुखार है, जो थमने का नाम नहीं लेता। आईसीसी वर्ल्ड कम के सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया से मिली शिकस्त से इसकी तपिश भले ही कुछ ठंडी पड़ी, पर जल्द ही एक बार फिर से इसमें उफाल आने वाला है। क्रिकेट की सरगर्मी बढ़ाने के लिए आ रहा है इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल का आठवां सीजन।
आईपीएल-8 अप्रैल इसी महीने शुरू होगा। इसकी अधिकारिक ब्रॉडकास्‍टर सोनी सिक्‍स और सेट मैक्स चलाने वाली कंपनी मल्टी स्‍क्रीन मीडिया है। कंपनी का कहना है कि आईपीएल-6 के लिए विज्ञापनों की 90 फीसदी बुकिंग हो चुकी है। यह पिछली साल की ऐड इन्‍वेंट्री से 10 से15 फीसदी ज्‍यादा है। आगामी सीजन के लिए विज्ञापनों की दरें भी अच्छी खासी बढ़ गई हैं। इस बार10 सेकेंड के लिए 4.75 से 5 लाख रुपये तक रखी गई है। पिछले साल 10 सेकेंड के लिए विज्ञापन की दर 4.25 लाख रुपये थी।
 मल्‍टी स्‍क्रीन मीडिया प्रेसिडेंट रोहित गुप्‍ता के मुताबिक इस सीजन में टूर्नामेंट की टाइटल स्‍पॉन्‍सर पेप्सी है। इसके अलावा इस बार तीन नए स्‍पॉन्‍सर पारले, रेमंड्स और मैजिक ब्रिक्स को टूर्नामेंट से जोड़ा गया है। इसके अलावा इसमें अमेजॉन डॉटकॉम और पेटीएम जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां भी जुड़ी हैं। टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन, दो पहिया निर्माता हीरो मोटोकॉर्प, मोबाइल निर्माता इंटेक्स भी प्रायोजकों की कतार में शामिल हैं। उम्‍मीद है कि पिछले सीजन में विज्ञापनों के जरिए मिले 800 करोड़ रुपये के मुकाबले इस साल आईपीएल का एड रिवेन्यू 900 से 950 करोड़ रुपये तक जा सकता है। इसे देखते हुए साल की शुरुआत में लगाई गई वह अटकलें झूठी साबित होती दिख रही हैं, जिनमें वर्ल्‍ड कप की वजह से इस बार आईपीएल की विज्ञापनों से होने वाली कमाई घटने की बात कही गई थी। आईपीएल की साल दर साल बढ़ती कमाई इस बात की तस्दीक करती है कि क्रिकेट को हाल-फिलहाल प्रायोजकों की कमी नहीं होने वाली है।

लालरोसंगा के हाथ आई दूरदर्शन की कमान

दूरदर्शन की डायरेक्टर जनरल (डीजी) विजयलक्ष्मी छाबड़ा के रिटायरमेंट के बाद डीडी की कमान सी.लालरोसंगा संभालेंगे। सी.लालरोसंगा को दूरदर्शन का अंतरिम महानिदेशक (डीजी) नियुक्त किया गया है। लालरोसंगा ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर जनरल थे।
डीडी की ओर से जारी एक वक्तव्य में बताया गया है कि 'किसान चैनल' और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए चार चैनलों की लॉन्चिंग को ध्यान में रखते हुए इस चुनौतीपूर्ण समय में सी.लालरोसंगा दूरदर्शन के महानिदेशक का पदभार संभाल लिया है। जानकारी के मुताबिक, लालरोसंगा स्थायी रूप से डायरेक्टर जनरल की नियुक्ति किए जाने तक डायरेक्टर जनरल का पद संभालेंगे। 
गौरतलब है कि लालरोसंगा 1991 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित हुए थे। इसके बाद वह डायरेक्टर के रूप में ऑल इंडिया रेडियो शिलांग की पूर्वोत्तर सेवा में शामिल हुए थे। इससे पहले वह आईजोल में ऑल इंडिया रेडियो में असिसटेंट न्यूज डायरेक्टर थे।

सन टीवी के एमडी कलानिधि मारन की संपत्तियां कुर्क

एयरसेल-मैक्सिस सौदे में मनी लांड्रिंग जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यूपीए सरकार में दूरसंचार मंत्री रहे दयानिधि मारन, उनके उद्योगपति भाई कलानिधि और परिवार के अन्य सदस्यों की 742.58 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है।
इससे पहले जांच एजेंसियां इस मामले में पिछले कुछ महीनों में मारन बंधुओं से कई बार पूछताछ कर चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत मारन की संपत्ति की कुर्की का आदेश जारी किया गया है। इसके तहत जो संपत्ति कुर्क की गई है उसमें मारन द्वारा सावधि जमा (एफडी) तथा म्यूचुअल फंड के तहत किए गए निवेश भी शामिल हैं। कलानिधि की पत्नी कावेरी की भी कुछ संपत्ति कुर्क की गई है। इनमें दयानिधि व अन्य की 7.47 करोड़ रुपये की एफडी, कलानिधि के 100 करोड़ रुपये की एफडी और 2.78 करोड़ रुपये मूल्य का म्यूचुअल फंड शामिल हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी की 1.30 करोड़ रुपये की एफडी व 1.78 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड की भी कुर्की की गई है। जानकारी के मुताबिक कुर्क की गई ज्यादातर संपत्तियां दयानिधि के भाई और सन टीवी के प्रबंध निदेशक कलानिधि की हैं।

01 April 2015

मीडिया के लिए नुकसानदेह हैऑटो इंडस्ट्री की सुस्त रिकवरी


...कब छंटेगी मंदी?
अखबारों, पत्रिकाओं से लेकर न्यूज चैनलों और न्यूज पोर्टलों तक पर नजर डालें, तो कार और दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियां समूची मीडिया इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वालों की कतार में काफी आगे खड़ी नजर आती हैं। मोबाइल, गैजेट, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों के साथ मीडिया में कारों और टूव्हीलर के विज्ञापन भी बहुतायत में रहते हैं। इस तरह ऑटो कंपनियां मीडिया हाउसों के रिवेन्यू का एक बड़ा स्रोत हैं। ऐसे में देश में ऑटो इंडस्ट्री में रिकवरी की सुस्त रफ्तार खुद इन कंपनियों के साथ ही मीडिया उद्योग को भी खासी चिंतित करने वाली है।
ऑटो कंपनियों की ओर से जारी बीते मार्च महीने के बिक्री के आंकड़े इस चिंता को बढ़ाने वाले हैं। ज्यादातर कार कंपनियों की बिक्री में गिरावट आई है। हालांकि दो पहिया वाहन निर्माताओं ने बढ़त दर्ज की है। मार्च में मारुति सुजुकी और ह्यूंडई मोटर इंडिया ने कार बिक्री में मामूली ग्रोथ दर्ज की है, वहीं जनरल मोटर्स और महिंद्रा के वाहनों की बिक्री में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2014-15 के मार्च महीने में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी  मारुति सुजुकी की कुल बिक्री में पिछले साल मार्च के मुकाबले 1.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इनमें घरेलू और निर्यात दोनों ही प्रकार की बिक्री शामिल हैं।
इस साल मार्च में मारुति ने कुल 1,11,555 यूनिट की बिक्री की जबकि पिछले साल मार्च में यह बिक्री 1,13,350 यूनिट की थी। वित्त वर्ष 2014-15 के अप्रैल-मार्च महीने में वित्त वर्ष 2013-14 के मुकाबले मारुति की कुल बिक्री में 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी रही। मारुति के मुताबिक इस साल मार्च में घरेलू स्तर पर होने वाली बिक्री में 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी रही। घरेलू स्तर पर मारुति ने कुल 1,03,719 यूनिट की बिक्री की जबकि पिछले साल मार्च में मारुति ने घरेलू स्तर पर 1,02,269 यूनिट की बिक्री की थी। लेकिन इस साल मार्च महीने में मारुति के निर्यात में 29.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस साल मार्च में आल्टो और वैगनआर की 4,01,59 यूनिट की बिक्री की गई जबकि पिछले साल मार्च में इन दोनों कारों की बिक्री 40,085 यूनिट थी। मार्च महीने में मारुति वैन ओमनी व इको की बिक्री में 20.7 फीसदी का इजाफा रहा।
वहीं ह्यूंडई मोटर इंडिया की कार बिक्री मार्च में 3.8 फीसदी की गिरावट के साथ 49,740 कारों की रही। पिछले साल मार्च में कंपनी ने 51,708 कारों बेची थीं। हालांकि घरेलू बाजार में कंपनी की बिक्री में 12.9 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। कंपनी ने देश में 35,003 के मुकाबले बीते माह 39,525 कारें बेचीं। मार्च माह में ही जनरल मोटर्स (जीएम) की बिक्री में 35.5 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जीएम ने मार्च में 4,257 कारों बेचीं, जबकि पिछले साल मार्च में 6,601 वाहन बिके थे। बहुउपयोगी वाहन बनाने वाली कंपनी महिंद्रा की बिक्री मार्च में सालाना आधार पर 12.44 फीसदी घटकर 45,212 पर आ गई। मार्च 2014 में कंपनी ने 51,636 वाहन बेचे थे। व्यावसायिक वाहन बनाने वाली हिंदुजा समूह की कंपनी अशोक लीलैंड ने वाहनों की बिक्री में 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी ने बीते माह 12,754 वाहन बेचे। पिछले साल मार्च में 10,281 वाहनों की बिक्री हुई थी।
दो पहिया वाहन बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी हीरो मोटोकॉर्प की बिक्री मार्च में 1.47 फीसदी की सालाना बढ़त के साथ 5,31,750 वाहनों की रही। पिछले साल मार्च में कंपनी ने 5,24,028 वाहन बेचे थे। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) की बिक्री 1.81 फीसदी की बढ़त के साथ 3,92,060 के मुकाबले 3,99,178 वाहनों की रही। रायल इनफील्ड ने अपने दो पहिया वाहनों की बिक्री में 42 फीसदी का उछाल दर्ज किया है। इनफील्ड ने बीते माह 33,679 वाहन बेचे, जबकि पिछले साल मार्च में उसकी बिक्री 23,693 वाहनों की रही थी।

तेजी से बढ़ रही हैं मीडिया और पत्रकारों पर हमले की घटनाएं


लोगों से जुड़ी खबरें लोगों तक पहुंचाना पत्रकारों और मीडिया का काम है। सुनने में यह बात बड़ी साधारण सी लगती है, पर खबरें लोगों तक पहुंचाने का यह मूल कर्म ही पत्रकारों के लिए सबसे बड़ा जोखिम साबित होता है। दुनिया भर में हाल के दिनों में पत्रकारों की हत्या, पत्रकारों पर बढ़ते हमले और उनके अगवा होने और धमकियां दिए जाने की घटनाओं में आई तेजी इसकी तस्दीक करती है।
विएना स्थित अंतर्राष्ट्रीय प्रेस संस्थान (आईपीआई) की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में मीडिया कर्मियों या पत्रकारों के साथ ऐसी घटनों की संख्या काफी बढ़ गई है। डेथ वॉच लिस्ट के अनुसार 2014 में दुनिया भर में 100 पत्रकार मारे गए। इनमें भारत के केवल 2 पत्रकार शामिल थे। यह आंकड़ा वर्ष 2013 के मुकाबले काफी कम है। उस वर्ष भारत में 11 पत्रकार मारे गए थे। गौरतलब है कि 2013 में भारत दुनिया में मारे गए मीडियाकर्मियों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गया था। गौर करने वाली बात है कि 2013 में ही उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर में दंगा हुआ था। इस साल मरने वाले पत्रकारों में से 4 उत्तर प्रदेश में काम कर रहे थे। इनमें बुलंदशहर में ज़ाकाउल्लाह, इटावा में राकेश शर्मा और मुजफ्फर नगर में मारे गए राजेश वर्मा और इसरार शामिल थे। डेथ वॉच लिस्ट में उन पत्रकारों के नाम शामिल किए जाते हैं, जिन पर पत्रकारिता या उनके पत्रकार होने की वजह से हमला होता है।
गौरतलब है कि भारत को 2013 में पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में सीरिया और इराक के बाद दुनिया का तीसरा सबसे खतरनाक देश माना गया था। वर्ष 2004 से 2013 तक की डेथ वॉच सूची में भारत पत्रकारों की हत्या के मामले में सातवें स्थान पर रहा।  वर्ष 2014 की आईपीआई की सूची के अनुसार, एशिया रीजन में कुल 23 पत्रकार मारे गए थे। इनमें से सबसे अधिक 5 पत्रकार पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मारे गए।
जिला और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे पत्रकार ज़्यादातर ख़बरें रिश्‍वतखोरी, राशन दुकान की मुनाफाखोरी, स्कूल में शिक्षकों के नदारद रहने की बात, ग्राम पंचायत के विवादित फैसले, अधिकारी की अनुपस्थिति, सड़कों व बिजली की समस्या और स्थानीय अधिकारीयों या विधायकों के कारनामों आदि की देते हैं। ऐसी खबरों के चलते कई बार उनकी जान तक खतरे में पड़ जाती है।

उत्तराखंड में शुरू होगा देश का पहला संस्कृत टीवी चैनल


भारतीय संस्कृति और प्रखर राष्ट्रवाद की माला जपने वाली वाली तमाम साधु-साध्वियों, योगियों और महंतों वाली केंद्र भाजपा सरकार और उसके मुखिया मोदी महाशय को उत्तराखंड के कांग्रेसी सीएम हरीश रावत ने अपने तरीके से आईना दिखाया है। रावत ने उत्तराखंड में देश का पहला संस्कृत चैनल खोलने की मंजूरी दे दी है। रावत ने संबंधित अधिकारियों को चैनल शुरू करने का विस्तृत प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार करने को कहा है। इस तरह उत्तराखंड संस्कृत चैनल शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। यानी जो काम ‘रामजादे’नहीं कर पाए, ह-रामजादों (बकौल ‘साध्वी’ निरंजन ज्योति) ने कर दिखाया।
उत्तराखंड की संस्कृत अकादमी की कार्य समिति में संस्कृत चैनल शुरू जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में संस्कृत चैनल के साथ-साथ एफएम रेडियो व कम्युनिटी रेडियो शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इन तीनों ही प्रस्तावों को मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से 25 मार्च को हरी झंडी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री, जोकि संस्कृत अकादमी के पदेन अध्यक्ष भी होते हैं, ने डीपीआर तैयार कर समीक्षा के लिए सचिव समिति के सामने रखने को कहा है। यह सचिव समिति ही चैनल के लिए नीति निर्धारण का काम करेगी। संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. सुरेश चरण बहुगुणा का कहना है कि भारत ही नहीं, संभवतः दुनिया के किसी भी देश में अब तक संस्कृत चैनल नहीं खोला गया है। पुराकाल से ही ऋषियों-मुनियों और देवी-देवताओं की भूमि के रूप में जाने जाने वाले उत्तराखंड में यह पहल होना सुखद है। संस्कृत को राज्य में दूसरी राजभाषा का दर्जा भी प्राप्त है और संस्कृत के विकास के लिए सरकार ने संस्कृत अकादमी के अलावा संस्कृत विश्वविद्यालय भी खोला है।

नहीं रहीं ‘दुनिया की दादी’ ओकावा


दुनिया की दादी यानी विश्व की सबसे उम्रदराज महिला मिसाव ओकावा अब दुनिया में नहीं रहीं। जापान में 1898 में जन्मी अकोवा की 117 साल की उम्र में मौत हो गई। जापानी मीडिया ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि ओकावा ने 5 मार्च को अपने नाती-पोतों के साथ अपना 117वां जन्मदिन मनाया था। जन्मदिन का केक खाने के बाद वे धीरे-धीरे बीमार होती गईं और 1 अप्रैल को दुनिया से विदा हो गई।
गौरतलब है कि 27 फरवरी 2013 को उन्हें दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला का खिताब दिया गया था। गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज किया गया था। ओकावा की मौत के बाद अमेरिका के गेटरुड वैवर दुनिया के सबसे उम्रदराज इंसान बन जाएंगे। वह इसी वर्ष 4 जुलाई को 117 वर्ष के हो जाएंगे। अकोवा से पहले सबसे उम्रदराज इंसान के खिताब जापान के ही जिरोमन किमुरा के पास था, जिनकी मौत जून 2013 को हुई थी। वह 116 साल 54 दिन तक जीवित रहे थे।
गौरतलब है कि ओकावा का जन्म उस वक्त हुआ था, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने हवाई द्वीप पर कब्जा कर पेप्सी-कोला नाम से एक नये ड्रिंक को लॉन्च किया गया था। ओकावा की लड़की पश्चिमी जापान के ओसाका में एक कपड़ा व्यापारी हैं।

सोशल मीडिया में छायी धौनी की बेटी तस्वीरें फर्जी

...ये रही असली तस्वीर

टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की बेटी की जो तस्वीरें सोशल मीडिया में इन दिनों वायरल हो रही हैं, वह फर्जी हैं। यह खुलासा खुद धौनी की पत्नी साक्षी ने एक ट्वीट के जरिए किया है। साक्षी ने ट्वीट करके कहा है कि बेटी जिबा की गलत तसवीरें सोशल मीडिया में छाईं हुईं हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि इंटरनेट परअब तक धौनी की बेटी के नाम पर जो भी तस्वीरें अपलोड की गई हैं, वह सब झूठी हैं। लोगों की उत्सुकता को देखते हुए साक्षी ने ट्विटर पर जिबा की एक तस्‍वीर डाली है, जिसमें सिर्फ उसकी अंगुलियां दिख रहीं हैं। इससे धौनी की बेटी के चेहरे की झलक पाने के लिए लोगों की जिज्ञासा और भी बढ़ गई है और यह नई तस्वीर अब सोशन मीडिया में छा गई है।
गौरतलब है कि साक्षी सिंह धौनी ने एक बेटी को छह फरवरी 2015 को जन्म दिया है। धौनी उस वक्त ऑस्ट्रेलिया में विश्वकप टूर्नामेंट में व्यस्त होने के कारणअपनी बेटी को देखने के लिए भारत नहीं आ पाये। अब जबकि धौनी भारत लौट आये हैं, धोनी से ज्यादा उनकी बेटी की फर्जी तसवीर सोशल मीडिया में छाई हुई है। हालांकि इस तसवीर की विश्वसनीयता पर संदेह शुरू से ही जताया जा रहा था।

‘रामजादे’ जो न कर पाए, रावत ने कर दिखाया


भारतीय संस्कृति और प्रखर राष्ट्रवाद की माला जपने वाली वाली तमाम साधु-साध्वियों, योगियों और महंतों वाली केंद्र भाजपा सरकार और उसके मुखिया मोदी महाशय को उत्तराखंड के कांग्रेसी सीएम हरीश रावत ने अपने तरीके से आईना दिखाया है। रावत ने उत्तराखंड में देश का पहला संस्कृत चैनल खोलने की मंजूरी दे दी है। रावत ने संबंधित अधिकारियों को चैनल शुरू करने का विस्तृत प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार करने को कहा है। इस तरह उत्तराखंड संस्कृत चैनल शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। यानी जो काम ‘रामजादे’नहीं कर पाए, ह-रामजादों (बकौल ‘साध्वी’ निरंजन ज्योति) ने कर दिखाया।
उत्तराखंड की संस्कृत अकादमी की कार्य समिति में संस्कृत चैनल शुरू जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में संस्कृत चैनल के साथ-साथ एफएम रेडियो व कम्युनिटी रेडियो शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इन तीनों ही प्रस्तावों को मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से 25 मार्च को हरी झंडी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री, जोकि संस्कृत अकादमी के पदेन अध्यक्ष भी होते हैं, ने डीपीआर तैयार कर समीक्षा के लिए सचिव समिति के सामने रखने को कहा है। यह सचिव समिति ही चैनल के लिए नीति निर्धारण का काम करेगी। संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. सुरेश चरण बहुगुणा का कहना है कि भारत ही नहीं, संभवतः दुनिया के किसी भी देश में अब तक संस्कृत चैनल नहीं खोला गया है। पुराकाल से ही ऋषियों-मुनियों और देवी-देवताओं की भूमि के रूप में जाने जाने वाले उत्तराखंड में यह पहल होना सुखद है। संस्कृत को राज्य में दूसरी राजभाषा का दर्जा भी प्राप्त है और संस्कृत के विकास के लिए सरकार ने संस्कृत अकादमी के अलावा संस्कृत विश्वविद्यालय भी खोला है।

मलेशियन इनसाइडर के तीन संपादक राजद्रोह में गिरफ्तार


मलेशिया एक मीडिया समूह के तीन संपादकों समेत पांच कर्मचारियों को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होके टैट और दि मलेशियन इनसाइडर न्यूज पोर्टल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जहाबर सादिक को पहले थाने में बयान दर्ज करवाने के लिए बुलाया और फिर वहीं उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मलेशिया के पुलिस प्रमुख खालिद अबु बकर ने गिरफ्तारी की पुष्टि तो की है, पर इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले पुलिस और मलेशियन कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन के अधिकारी मलेशियन इनसाइडर पोर्टल के कार्यालय पर छापा मारकर पोर्टल के प्रबंध संपादक लियोनेल मोरेस, फीचर संपादक जुल किफली सुलोग तथा मलय समाचार संपादक अमीन इसकंदर को भी हिरासत में चुके हैं। उनपर भी राजद्रोह का ही आरोप लगाया गया है। पुलिस ने जांच के नाम पर दफ्तर से कई कम्प्यूटरों और अन्य सामान भी जब्त किया है। बताया जाता है कि इन सभी की गिरफ्तारी एक समाचार रिपोर्ट को लेकर की गई है। इस मामले में इन्हें इस्लामी कानून के तहत सजा दिए जाने की बात कही जा रही है। गिरफ्तार संपादकों और कर्मचारियों के वकील के मुताबिक मजिस्ट्रेट ने संपादकों को रिमांड पर लेने की अपील ठुकरा दी है। उधर सेंटर फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म और साउथइस्ट एशियन प्रेस अलायंस ने गिरफ्तार किए गए तीनों संपादकों को जल्द से जल्द रिहा करने की मांग की है। गौरतलब है कि मलेशिया में पिछले अगस्त 2014 से ही राजद्रोह मामले में लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं । ‌गिरफ्तार किए गए लोगों में इनमें विपक्षी नेता अनवर इब्राहिम भी शामिल हैं।