जानकारी के मुताबिक रेलवे में एक ऐसी योजना अमल लाने की बात चल रही है, जो अगर लागू हो जाए तो यात्रियों को जहां काफी आराम मिलेगा, वहीं टीटी महाशयों की दो नंबर की आधी कमाई ही बंद हो जाएगी। इसी के चलते इस योजना के लागू हो पाने को लेकर अशंका भी जताई जा रही है।
मामला है यात्रियों को ट्रेन में ही रिजर्वेशन कराने की सुविधा देने का । इसके तहत आप सीधे ट्रेन में सवार होकर टीटीई से बर्थ रिजर्व करा सकेंगे। इसके लिए टीटीई को एक हैंड हेल्ड डिवाइस दी जाएगी। यह मशीन सीधे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) सर्वर से जुड़ी रहेगी, जिससे इससे खाली होने वाली सीटों की अपडेट जानकारी तुरंत टीटीई को मिलती रहेगी और वह कैंसिल आखिरी समय में होने वाले रिजर्वेशन की जगह दूसरे यात्रियों को बर्थ एलॉट कर सकेंगे।
प्रयोग के तौर पर यह सुविधा गरीब रथ में शुरू की गई है। योजना काफी सफल होती दिख रही है। रेलवे बोर्ड के आदेश मिलते ही सभी ट्रेनों में यह सुविधा शुरू की जा सकती है।
अबतक पास केवल रिजर्वेशन का चार्ट होता है। इस कारण टिकट कैंसिल होने पर खाली हुई सीट की जानकारी टीटीई को नहीं होती है। इसके कारण चलती ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं होता। आमतौर पर इन्ही खाली पड़ी बर्थ को तिगुने-चौगुने में जरूरतमंद लोगों को बेच कर टीटीई मोटी कमाई करते हैं।
बताया जाता है कि इस गोरखधंधे के तार ऊपर तक जुड़े होते हैं और हिस्सा टॉप तक जाता है। इसी कारण चलती ट्रेन में रिजर्वेशन की योजना के लागू हो पाने को लेकर शंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि रेल मंत्री सुरेश प्रभु की साफ-सुथरी और सुधारवादी छवि को देखते हुए कहीं न कहीं उम्मीद भी है कि शायद ऐसा हो ही जाए।
मामला है यात्रियों को ट्रेन में ही रिजर्वेशन कराने की सुविधा देने का । इसके तहत आप सीधे ट्रेन में सवार होकर टीटीई से बर्थ रिजर्व करा सकेंगे। इसके लिए टीटीई को एक हैंड हेल्ड डिवाइस दी जाएगी। यह मशीन सीधे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) सर्वर से जुड़ी रहेगी, जिससे इससे खाली होने वाली सीटों की अपडेट जानकारी तुरंत टीटीई को मिलती रहेगी और वह कैंसिल आखिरी समय में होने वाले रिजर्वेशन की जगह दूसरे यात्रियों को बर्थ एलॉट कर सकेंगे।
प्रयोग के तौर पर यह सुविधा गरीब रथ में शुरू की गई है। योजना काफी सफल होती दिख रही है। रेलवे बोर्ड के आदेश मिलते ही सभी ट्रेनों में यह सुविधा शुरू की जा सकती है।
अबतक पास केवल रिजर्वेशन का चार्ट होता है। इस कारण टिकट कैंसिल होने पर खाली हुई सीट की जानकारी टीटीई को नहीं होती है। इसके कारण चलती ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं होता। आमतौर पर इन्ही खाली पड़ी बर्थ को तिगुने-चौगुने में जरूरतमंद लोगों को बेच कर टीटीई मोटी कमाई करते हैं।
बताया जाता है कि इस गोरखधंधे के तार ऊपर तक जुड़े होते हैं और हिस्सा टॉप तक जाता है। इसी कारण चलती ट्रेन में रिजर्वेशन की योजना के लागू हो पाने को लेकर शंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि रेल मंत्री सुरेश प्रभु की साफ-सुथरी और सुधारवादी छवि को देखते हुए कहीं न कहीं उम्मीद भी है कि शायद ऐसा हो ही जाए।

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