05 April 2015

आईआरएस के सर्वे पर फिर छिड़ गई है रार

इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) के रीडरशिप सर्वे को लेकर एक बार फिर से विवाद खड़ा हो गया है। कई मीडिया घराने उसके ताजा सर्वे को झूठे आंकड़ों के दम पर पाठकों को गुमराह करने की कोशिश बता रहे हैं। आईआरएस 2014 सर्वे को फर्जी बताने वालों में जागरण और अमर उजाला शामिल है।
सर्वे के मुताबिक दैनिक जागरण ने सात फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है और इसकी पाठक संख्या 166.3 लाख पर पहुंच गई है। दैनिक भास्कर ने आठ फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज कर अपने पाठकों की संख्या 138.3 लाख कर ली है। अमर उजाला के पाठक दस फीसदी बढ़े हैं और इनकी संख्या 78 लाख पहुंच गई है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने पाठकों की संख्या पांच फीसदी बढ़ाई है और यह 75.9 लाख पहुंच गई है, जबकि द हिंदू ने दस फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है और इसके पाठकों की तादाद 16.2 लाख पर पहुंच चुकी है। साफ है, ये सारे अखबार अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान (दोनों अखबारों की पाठकों की तादाद चार फीसदी बढ़ी है) की तुलना में पाठकों की तादाद बढ़ाने में आगे रहे हैं। 
विरोध करने वाले समाचारपत्रों ने इसे खारिज करते हुए झूठ का पुलिंदा करार दिया था। एक बयान में इन अखबारों ने कहा था, कि इस सर्वेक्षण में भारी असमानताएं हैं।
सर्वेक्षण सामान्य तर्कों की कसौटी पर फेल साबित हुआ है। सर्वेक्षण के आंकड़े ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के प्रमाणित आंकड़ों से बिल्कुल उलट हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले उदाहरणों में ‘हिंदू बिजनेस लाइन’ से जुड़े आंकड़े थे। इनके हिसाब से ‘हिंदू बिजनेस लाइन’ के जितने पाठक चेन्नई में थे उसके तिगुने मणिपुर में थे। नागपुर से निकलने वाले अंग्रेजी अखबार हितवाद की प्रमाणित प्रसार संख्या 60,000 है, लेकिन सर्वेक्षण के मुताबिक इसका एक भी पाठक नहीं था।

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