02 April 2015

राजन बाबू फिर ले बैठे जेटली से पंगा


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन जाने-अनजाने अकसर कुछ ऐसा बोल जाते हैं, जिससे उनकी गवर्नरी कई बार खतरे में पड़ती दिखने लगती है।
इसी सिलसिले को जारी रखते हुए राजन एक बार फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली से पंगा ले बैठे हैं। बात आरबीआई की 80वीं सालगिरह पर आयोजित समारोह की है। इसमें अपने भाषण में वह ऐसी बात बोल बैठे जो जेटली के स्टैंड से ठीक विपरीत बैठती है।

समारोह में राजन ने बैंकों को इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को दिए जा रहे भारी-भरकम कर्जों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि बैंकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह इन्फ्रा सेटर को इतना लोन न दे बैठें कि खुद उनकी वित्तीय स्थिरता ही पर संकट आ जाए। राजन ने कहा कि देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को वित्तीय साधनों की काफी जरूरत है, पर कई बैंक पहले ही इस सेक्टर को काफी ज्यादा लोन दे चुके हैं।

इन्फ्रा सेक्टर से जुड़े कई बड़े कॉरपोरेट घराने पहले ही काफी बड़े लोन ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के वित्त पोषण पर दिया जा रहा जोर कहीं देश की वित्तीय स्थिरता पर भारी न पड़ जाए, जोकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।

राजन ने यह बात बैंकों की बढ़ती जा रही गैरनिष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के संदर्भ में कही। बैंकों का एनपीए दिसंबर 2014 में बढ़कर तीन लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है। मजे की बात यह है कि राजन के भाषण के वक्त इन्फ्रासेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर देने वाले पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों ही मौजूद थे।
गौरतलब है कि आरबीआई गवर्नर का यह बयान वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के वित्त पोषण पर जोर दिए जाने के विपरीत है। जेटली इस साल बजट में इन्फ्रा सेक्टर के लिए आवंटन को बढ़ा कर 70 हजार करोड़ रुपये कर दिया है।

इसके अलावा वह इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने की वकालत भी बार-बार करते रहे हैं।

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