वित्तीय संकट का रोना रोने वाली भारतीय रेलवे अपनी कमाई बढ़ाने के लिए अब नया फंडा अपनाने वाली है। यह तरकीब हैं ब्रांडिंग यानी विज्ञापनों के सहारे कमाई करने की।इसके तहत रेलवे ट्रेनों, कोचों, स्टेशनों और यहां तक कि बेडिंग की ब्रैंडिंग की योजना को अंतिम रूप दे रही है। रेलवे को इससे 9,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। हालांकि यह योजना कोई नई नहीं है। करीब पांच साल पहले यूपीए सरकार के समय ही कुछ ट्रेनों पर विज्ञापन प्रदर्शित करने के साथ ही इन ट्रेनों के नाम में प्रायोजक कंपनियों का नाम जोड़ने की योजना थी। पर प्रायोगिक स्तर के बाद इसे ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।
अब रेलवे एक बार फिर नए सिरे से इस कवायद में जुट गई है। जानकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड मेंबर (ट्रैफिक) अजय शुक्ला की अगुवाई में एक टास्क फोर्स इस मामले पर 30 अप्रैल तक रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रचार नीति और इसे लागू करने के तरीकों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
हाल ही में इंजिनियरिंग कंसल्टेंसी राइट्स (आरआईटएस) लिमिटेड के एक अध्ययन में यह बात सामने आने के बाद कि ब्रैंडिंग से रेलवे को 9,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है, रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने टास्क फोर्स का गठन किया था।जानकारी के मुताबिक रेल मंत्री कॉर्पोरेट ब्रैंड्स को स्टेशनों और ट्रेनों के नाम के लिए बोली लगाए जाने की छूट दिए जाने के विचार से सहमत हैं।
एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि रेलवे सिर्फ 26 राजधानी, 20 शताब्दी और 32 दुरंतो ट्रोनों के विज्ञापन बेचकर ही सालाना करीब 780 करोड़ रुपये कमा सकती है।
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