भारतीय संस्कृति और प्रखर राष्ट्रवाद की माला जपने वाली वाली तमाम साधु-साध्वियों, योगियों और महंतों वाली केंद्र भाजपा सरकार और उसके मुखिया मोदी महाशय को उत्तराखंड के कांग्रेसी सीएम हरीश रावत ने अपने तरीके से आईना दिखाया है। रावत ने उत्तराखंड में देश का पहला संस्कृत चैनल खोलने की मंजूरी दे दी है। रावत ने संबंधित अधिकारियों को चैनल शुरू करने का विस्तृत प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार करने को कहा है। इस तरह उत्तराखंड संस्कृत चैनल शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। यानी जो काम ‘रामजादे’नहीं कर पाए, ह-रामजादों (बकौल ‘साध्वी’ निरंजन ज्योति) ने कर दिखाया।
उत्तराखंड की संस्कृत अकादमी की कार्य समिति में संस्कृत चैनल शुरू जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में संस्कृत चैनल के साथ-साथ एफएम रेडियो व कम्युनिटी रेडियो शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इन तीनों ही प्रस्तावों को मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरफ से 25 मार्च को हरी झंडी दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री, जोकि संस्कृत अकादमी के पदेन अध्यक्ष भी होते हैं, ने डीपीआर तैयार कर समीक्षा के लिए सचिव समिति के सामने रखने को कहा है। यह सचिव समिति ही चैनल के लिए नीति निर्धारण का काम करेगी। संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. सुरेश चरण बहुगुणा का कहना है कि भारत ही नहीं, संभवतः दुनिया के किसी भी देश में अब तक संस्कृत चैनल नहीं खोला गया है। पुराकाल से ही ऋषियों-मुनियों और देवी-देवताओं की भूमि के रूप में जाने जाने वाले उत्तराखंड में यह पहल होना सुखद है। संस्कृत को राज्य में दूसरी राजभाषा का दर्जा भी प्राप्त है और संस्कृत के विकास के लिए सरकार ने संस्कृत अकादमी के अलावा संस्कृत विश्वविद्यालय भी खोला है।

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